










बीकानेर,‘किण्वित जैविक खाद से समृद्ध मृदा, आय वृद्धि एवं पर्यावरण संतुलन’ विषय पर एक दिवसीय किसान गोष्ठी का
बुधवार को आयोजित की गई। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली एवं कृषि विज्ञान केंद्र बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में गोविंदसर में आयोजित इस गोष्ठी में किसानों को किण्वित जैविक खाद के विभिन्न पक्षों की विस्तार से जानकारी दी गई।
परियोजना सह-समन्वयक डॉ. कपिला शेखावत ने बताया कि किण्वित जैविक खाद (एफ ओ एम) एक जैविक रूप से स्थिर उत्पाद है, जो नियंत्रित वायवीय या अवायवीय परिस्थितियों में पशु गोबर, फसल अवशेष (जैसे धान की पराली) एवं अन्य कृषि उप-उत्पादों के सूक्ष्मजीवीय किण्वन से प्राप्त होता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार उपाध्याय ने बताया कि किण्वन प्रक्रिया के दौरान जटिल कार्बनिक यौगिक सरल एवं जैव-उपलब्ध पोषक तत्वों में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे मृदा की उर्वरता एवं सूक्ष्मजीव गतिविधियाँ बढ़ती हैं। एफ ओ एम धीमी गति से पौधों को निरंतर पोषक तत्व उपलब्ध कराता है तथा पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार करता है।
डॉ. विशाल त्यागी ने एफ ओ एम से मृदा संरचना में सुधार, पोषक तत्व अवशोषण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मृदा जनित रोगों एवं कीटों के प्रभाव को कम करने तथा विशेष रूप से बलुई मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने में सहायक है।
डॉ. अर्जुन सिंह ने बताया कि एफ ओ एम के उपयोग से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे कृषि प्रणाली अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनती है। गोष्ठी में 150से अधिक किसानों ने भाग लिया । प्रधान कृषि वैज्ञानिक
डॉ. स्मृति रंजन पधान ने किसानों को जैविक खेती के महत्व से अवगत कराया। डॉ. दुर्गा सिंह (कृषि विज्ञान केंद्र, बीकानेर) ने मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. एम. एल. रैगर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। यह परियोजना मारुति सुजुकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के आर्थिक सहयोग से संचालित की जा रही है।
कार्यक्रम में डॉ. राजीव कुमार सिंह, डॉ. सुभाष बाबू, डॉ. ऋषि राज, डॉ. मोना नगरगड़े तथा परियोजना स्टाफ रामेश्वर पांडे, रोहित यादव अन्य का सहयोग रहा।
