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बीकानेर, राजस्थान राज्य अभिलेखागार द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमीनार मंगलवार को संपन्न हुई। राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में ‘अभिलेखीय दस्तावेजः उनका प्रबंधन और इतिहास लेखन में भूमिका’ विषय पर आयोजित सेमिनार में देश के विभिन्न राज्यों एवं विश्वविद्यालयों से विषय विशेषज्ञों ने अभिलेखागारों के अधिकारी और शोधार्थियों ने सेमीनार में अभिलेखीय दस्तावेजों के प्रबन्धन और इनकी इतिहास लेखन में महती भूमिका पर चितंन और मनन किया। भविष्य के अभिलेखागार को ई-अभिलेखागार कर तकनीक डाटा स्टोरेज की समस्या, अभिलेखों में एआई का प्रयोग आदि विषयों सहित अभिलेखों के प्रमाणिक व वास्तविकता के आधार पर इतिहास लेखन पर चर्चा की गई। यह विमर्श भी हुआ कि इतिहास को समय-समय पर ऐतिहासिक स्त्रातों के आधार पर अद्यतन करते रहना चाहिए।शोधार्थियों को भाषा की पकड़ और ज्ञान के लिये प्रशिक्षित करना चाहिए।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल थे। राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली के पूर्व निदेशक श्री सैयद फरीद अहमद, राज्य कर्मचारी चयन आयोग की सदस्य और इतिहासकार श्रीमती सज्जन पोसवाल, राजस्थान राज्य अभिलेखागार निदेशक श्री चन्द्रसेन सिंह शेखावत एवं सहायक निदेशक, अभिलेखागार डॉ बसंत सिंह सोलंकी विशिष्ट अतिथि रहे।

विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने अभिलेखागार को भारत का एक अद्भुत संग्रह बताया और कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर अभिलेखागार के विकास के लिए आवश्यक बजट आवंटित करती है। अभिलेखों के डिजिटाईजेेशन के लिये बजट स्वीकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि अभिलेखागार के विकास के लिये राज्य सरकार से किसी प्रकार की आवश्यकता होगी तो वह पैरवी करेंगे।
पोसवाल ने अभिलेखागार में उपलब्ध अभिलेखों के बारे बताया और अभिलेखागार की विभिन्न शाखाओं द्वारा संग्रहित अभिलेखों व उनकी स्थिति को भी रेखांकित किया। इनमें परिवर्तन लाने का सुझाव दिया है।

सैयद अहमद ने अभिलेख संग्रहालय लिखित अभिलेखागार और ई-अभिलेखागार सहित अभिलेखों के डिजिटल, परिरक्षण, अभिलेख प्रबन्धन और प्रशिक्षण के बारे में बताया और कहा कि भविष्य में तकनीकी को देखते हुए ई-अभिलेखागार के लिये हमें अभी से तैयार रहना चाहिये। शेखावत द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया और प्रस्तुत विषयों की क्रियान्विति पर बल दिया। सोलंकी द्वारा दो दिवसीय समारोह का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
हिन्दी विश्व भारती द्वारा शोध पत्रिका विश्वम्भरा का विमोचन किया गया। पत्रिका के प्रधान सम्पादक डा. गिरजाशंकर शर्मा राजस्थान राज्य अभिलेखागार के निदेशक रहे हैं।
कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्र हुए। जिसमें विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा 26 शोध पत्र प्रस्तुत किये गये। इस दौरान अभिलेख व्यवस्था, डिजिटाईजेशन, परीरक्षण, अभिलेख प्रबन्धन एवं अभिलेखो का मूल्यांकन और ई-अभिलेखागार आदि विषयों पर विस्तृत शोध पत्र डा हरिमोहन मीना, सह समन्वयक, सेमीनार, इति बहादुर, डा राजेन्द्र कुमार, राजशेखर पुरोहित इत्यादि ने प्रस्तुत कियेे। कार्यक्रम में डा चन्द्रशेखर कच्छावा, सुखाराम, ऋषिराज थानवी, नितिन गोयल, राजेन्द्र कुमार, कुमार रामकृष्णा, डा फारूख चौहान, पंकज थानवी, राजशेखर, मोहर सिंह सलावद, राजेन्द्र जोशी, महावीर सिंह सहित विभाग कर्मचारीगण उपस्थित रहें। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित विभाग के सहायक निदेशक  रामेश्वर बैरवा द्वारा किया गया।

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