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बीकानेर,आज मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण एवं सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम हेतु एक व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन बाल रोग विभाग, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज एवं पीबीएम अस्पताल, बीकानेर के सेमिनार हॉल में किया गया। यह कार्यक्रम बाल रोग विभाग, बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी, एडोलसेंट हेल्थ अकादमी, लायंस क्लब इंटरनेशनल (बीकानेर शाखा) तथा नारी शक्ति संगठन, बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. सारिका स्वामी (अध्यक्ष, एडोलसेंट हेल्थ अकादमी, बीकानेर) ने एचपीवी संक्रमण से संबंधित रोगों, उनके लक्षणों एवं उपचार के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर की अतिरिक्त प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. रेखा आचार्य ने एचपीवी वैक्सीन एवं भारत सरकार की नई टीकाकरण नीति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं प्रधान समन्वयक प्रोफेसर डॉ. जी. एस. तंवर (विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर) ने प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर एवं वैक्सीन की सार्वजनिक जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है, जो मुख्यतः मानव पैपिलोमा वायरस संक्रमण के कारण होता है। इस रोग की प्रभावी रोकथाम टीकाकरण द्वारा संभव है, जिसके लिए रिकॉम्बिनेंट वैक्सीन उपलब्ध है।

डॉ. तंवर ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 9–14 वर्ष की आयु की बालिकाएँ इस वैक्सीन की प्राथमिक लक्षित जनसंख्या हैं, जिनमें सामान्यतः दो डोज़ की अनुशंसा की जाती है, हालांकि एक डोज़ भी संक्रमण की रोकथाम में प्रभावी सिद्ध हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) एवं भारत सरकार ने 14 वर्ष आयु की किशोरियों के लिए तीन माह का पायलट टीकाकरण अभियान प्रारम्भ किया है, जिसमें लगभग 1.25 करोड़ बालिकाओं को लक्षित किया गया है। इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ 28 फरवरी 2026 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया तथा अब तक लगभग तीन लाख बालिकाओं को टीकाकरण किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1.2 लाख महिलाएँ सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित होती हैं तथा लगभग 80 हजार महिलाओं की मृत्यु इस रोग के कारण होती है। अतः इस टीके के माध्यम से इस रोकथाम योग्य कैंसर के बोझ को कम करना अत्यंत आवश्यक है।

वैज्ञानिक चर्चा में यह भी बताया गया कि 15–20 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों एवं 9 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों में भी टीकाकरण उपयोगी है, जहाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन दो डोज़ की अनुशंसा करता है, जबकि एक डोज़ पर भी अध्ययन जारी हैं। 20–26 वर्ष आयु वर्ग में तीन डोज़ का कार्यक्रम उपयुक्त माना जाता है तथा 26–45 वर्ष आयु वर्ग में टीकाकरण का निर्णय व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर किया जाता है। इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड व्यक्तियों में तीन डोज़ अनिवार्य रूप से दिए जाने चाहिए। दो डोज़ छह माह के अंतराल पर तथा तीन डोज़ 0, 2 एवं 6 माह के अंतराल पर दी जाती हैं।

कार्यक्रम में वरिष्ठ आचार्य प्रोफेसर डॉ. रेणु अग्रवाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए एचपीवी टीकाकरण की आवश्यकता पर बल दिया। वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए महिला संगठनों को जनजागरूकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

लायंस क्लब की सदस्य श्रीमती मधु खत्री ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए आश्वासन दिया कि वे अपने परिवार एवं समाज में एचपीवी वैक्सीन के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगी। कार्यक्रम में लगभग 40 महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी की।

इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. कुलदीप सिंह बित्तू, प्रोफेसर डॉ. मुकेश बेनीवाल, डॉ. पवन धारा, डॉ. इंद्रा चौधरी सहित विभाग के अन्य चिकित्सक एवं रेजिडेंट डॉक्टर भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल समन्वयन वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. सौरभ पुरोहित द्वारा किया गया।।

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