












बीकानेर,जिला उद्योग संघ के चुनाव 20 मार्च को है। अध्यक्ष पद के चुनाव में डी.पी. पच्चीसिया और सुशील थिरानी आमने सामने है। पच्चीसिया 17 वर्षों से जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष रहे हैं। बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल अध्यक्ष जुगल राठी ने थिरानी को समर्थन दिया है। प्रत्याशी सुशील थिरानी का कहना है कि बीकानेर जिला उद्योग संघ में 17 वर्षों से एक ही व्यक्ति का संचालन है। संघ में पारदर्शिता और लोकतंत्र खत्म हो गया है। चुनाव प्रक्रिया संघ के संविधान के अनुरूप नहीं है। दरअसल यह चुनाव बीकानेर के औद्योगिक विकास के मुद्दों पर नहीं लड़ा जा रहा है। जब बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के अध्यक्ष जुगल राठी का चुनाव हुआ तब डी.पी. पच्चीसिया ने राठी के खिलाफ मनमोहन कल्याणी को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में पच्चीसिया ग्रुप के कल्याणी चुनाव हार गए। तब से राठी और पच्चीसिया के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। अब उद्योगिक संगठन की लड़ाई बीकानेर के औद्योगिक विकास के मुद्दों की नहीं है, बल्कि अपनी ताकत दिखाने की तथा एक दूसरे को पटकनी देने की है। इस चुनाव को राजनीतिक पुट भी दिया जा रहा है। जिला उद्योग संघ के चुनाव में यह एक गंभीर सवाल है कि ऐसे संगठनों के बनाने और चुनाव करवाने के उद्देश्य क्या होना चाहिए ? ऐसे संगठन और इससे जुड़े लोग मुद्दों और उद्देश्यों से क्यों भटक जाते हैं। लोकतंत्र में ऐसे संगठनों की नितान्त आवश्यकता है, परन्तु तब ही जब संस्थाएं मुद्दों और उद्देश्यों पर काम करें। स्वार्थ पूर्ति का हथियार नहीं बने।
जिला उद्योग संघ का यह चुनाव उद्योग जगत के लोगों के समक्ष कई सवाल खड़े करता है। क्या संघ के उद्देश्यों के इतर कोई चुनाव का एजेण्डा होना चाहिए। मतदाताओं की जिम्मेदारी है कि संघ को उद्देश्यों से नहीं भटकने दें। अभी जिस तरह की फजीहत जिला उद्योग संघ के चुनाव में हो रही है कम से कम ऐसी अनुमति तो मतदाताओं को नहीं देनी चाहिए। 17 वर्षों से जो व्यक्ति इस संघ का अध्यक्ष रहा है वो किसी की कृपा से तो अध्यक्ष नहीं बना है। चुनाव जीता है। जो भी काम किया है जनता के सामने है। ये सवाल उठाने वाले बताएं कि उन्होंने 17 वर्षों तक बीकानेर के औद्योगिक विकास की कितनी बार आवाज उठाई। पच्चीसिया ने 17 वर्षों में क्या किया इसका आकलन किया जा सकता है। जबाव मांगा जा सकता है। तथ्यों के आधार पर टिप्पणी की जा सकती है, परन्तु किसी तरह का आरोप लगाना उचित नहीं है।
जिला उद्योग संघ जैसे कई संगठन लोकतंत्र के विकास के साथ-साथ सामाजिक, व्यावसायिक, धार्मिक और विभिन्न गतिविधियों के संचालन के लिए बने हैं। ये संगठन वैसे लोकतंत्र के हिस्से और राष्ट्रीय विकास में भागीदार है। दरअसल ऐसे संगठन लोकतंत्र में एक सामूहिक चेतना शक्ति है जो लोकतंत्र को पुष्ट बनाती है। ऐसे संगठनों के बलबूते पर ही अपना घर दिव्यांग, मंदबुध्दि और घरों से विलग लोगों की देखभाल होती है। धूमावती माताओं के कल्याण जैसे मानवीय करूणा के काम समाज में करने वाले लोग आगे आते हैं। वहीं कई संगठन और लोग ऐसे बैनर की आड में सत्ता की दलाली, नेताओं की जी हजूरी और अफसरों की हाजरी भरककर अपने स्वार्थ पूरे करने से नहीं चुकते। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियां कुछेक संगठनों में दिखाई देती है। इन पर चेहेतों का वरहस्त, अफसरों की कृपा और नेताओं का आशीर्वाद बरसता रहता है, क्योंकि वे इनके हाथ के इंसट्यूमेंट बनकर काम करते है। ऐसे संगठनों के पीछे उनका अपना सुदृढ़ कोकस काम करता है। जिसे तोड़ पाना आसान काम नहीं है।
जिला उद्योग संघ और बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल को केवल बीकानेर के औद्योगिक विकास की प्राथमिकता को ध्यान में रखकर चुनाव के मुद्दे पर काम करना चाहिए। तभी ऐसे संगठनों की कोई उपादेयता बनी रह सकती है अन्यथा तो राजनीति करने वाले तो बहुत सारे मंच है। इन संघों की विश्वसनीयता उद्देश्यों और मुद्दों पर ही टिकी रह सकती है। संगठनों में व्यक्ति गौण होना चाहिए। उद्देश्य और मुद्दे प्रमुख हो तो ही भला हो सकता है। तभी संगठनों के अध्यक्षों की छवि बनी हर सकती है। अन्यथा तो जोड़ तोड़ से कोई कुछ भी कर लें। जनता और लोकतंत्र में कोई साख नहीं बन सकती। जिला उद्योग संघ के मतदाताओं को अपने विवेक से बेहतर उद्देश्य के लिए अपना अध्यक्ष चुनना चाहिए।
