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बीकानेर, उरमूल सीमांत समिति द्वारा द्वारा बाजरा व मोटे अनाज के उपयोग एवं उसके मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों का दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जैसलमेर, फलोदी, बीकानेर और गंगानगर सहित विभिन्न जिलों से आए 300 किसानों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर राजुवास के कुलगुरु डॉ सुमंत व्यास, उरमूल सीमांत की चैयरपर्सन डॉ सुशीला ओझा, एसकेआरएयू की प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. दीपाली धवन, राजु वास के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ आर.के. धुरिया सहित राजस्थान पुलिस के पूर्व उप पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. सुमंत व्यास ने पारंपरिक ज्ञान और पारंपरिक खाद्य प्रणालियों की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में टिकाऊ, स्वस्थ और व्यवहारिक जीवन के लिए पारंपरिक खाद्य प्रणालियाँ वर्तमान चुनौतियों का प्रभावी समाधान हैं।
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. दीपाली धवन ने किसानों को बाजरा व मोटे अनाजों की खेती एवं उसके विभिन्न उपयोगों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोटा अनाज श्री अन्न के नाम से जाना जाता है, यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है तथा कई बीमारियों से बचाव में सहायक है।
सुशीला ओझा ने बताया कि उरमूल सीमांत लंबे समय से पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। वर्तमान में संस्था जैविक खेती, बायोगैस, बागवानी तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष प्रयास कर रही है।
उरमूल सीमांत का कार्यक्षेत्र राजस्थान के विभिन्न हिस्सों तक विस्तृत है। संस्था वर्तमान में राजस्थान के 16 जिलों में 15,000 से अधिक किसानों के साथ मिलकर टिकाऊ खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है, जिसमें पारंपरिक फसलों, जैविक खेती और स्थानीय खाद्य प्रणालियों को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जीवनराम ने संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए श्रीअन्न के उपयोग पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डिम्पल कुमारी ( एफ ई एस ) प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश मेघवाल (बरसलपुर) तथा उदाराम मेघवाल ने भी अपने विचार साझा किए। अशोक भाटी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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