










बीकानेर,कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन पथ के अनथक राही थे। जिनको साहित्य की सभी विधाओं में 175 से अधिक पुस्तकें प्रकाश में लाने के साथ-साथ अपने सटीक-युगानुकूल प्रेरक रचाव के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी रचनाओं में समकालीन जीेवन बोध के प्रति गहन गतिशील वृत्ति रही है। यह उद्गार ख्यातनाम आलोचक-शिक्षाविद् डॉ. उमाकांत गुप्त ने प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह के समापन में अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।
डॉ. गुप्त ने आगे कहा कि उनके साहित्य में आर्ष ग्रंथों की प्रासंगिकता तर्काधारित है। अगली पीढ़ी तैयार करने में उनका योगदान अद्भुत रहा। जिनकी प्र्रेरणा और मार्गदर्शन हमारे लिए हमेशा प्रकाश पुंज की तरह रहेंगे।
समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार, कवि एवं आलोचक मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा का विपुल साहित्य सृजन हमेशा नवोन्मेष से परिपूर्ण रहा है। लक्ष्मीनारायण रंगा के पौराणिक तथा उपनिषदों के आख्यानों पर आधारित नाटकों में अनेक चरित्र, घटनाएं और भाषा इस नवोन्मेष की मुंह बोलती मिसालें हैं। तिवाड़ी ने उनके नाटकों के अनेक उदाहरण देते हुए अपने कथन की पुष्टि की।
समारोह के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ आलोचक-कथाकार डॉ. मदन सैनी ने इस अवसर पर कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की ऐसी बहुप्रतिभावान शख्सियत थे, जिनका विराट अनुभव संसार था। रंगा की साहित्य से इतर संपादन, अनुवाद, नृत्य, शिक्षा, खेल आदि क्षेत्रों में भी रचनात्मक एवं सृजनात्मक प्रतिभा प्रेरणादायक है।
इस अवसर पर रंगा के विराट व्यक्तित्व और कृतित्व को संक्षिप्त में साझा करते हुए वरिष्ठ व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने उन्हें विभिन्न कलाओं का समर्पित मौन साधक बताया। वरिष्ठ शिक्षाविद् विजगोपाल पुरोहित ने स्वरचित अंग्रेजी कविता के माध्यम से रंगा के व्यक्तित्व और कृतित्व को काव्यात्मक रूप से पेश किया। इसी कड़ी में रंगा के शिष्य प्रतीक आचार्य एवं शिक्षाविद् हनुमान छींपा ने भी अपने विचार रखे।
राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने अपने पिताश्री कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की लंबी सृजन-यात्रा के सदंर्भ में कुछ अनछुए प्रसंग साझा किए।
प्रारंभ में वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश रंगा ने अपना स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि शीघ्र ही कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा के महत्वपूर्ण तीन कलानुशासनों साहित्य, रंगकर्म एवं शिक्षा के क्षेत्र की प्रतिभाओं को तीसरे वर्ष भी राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा-सम्मान अर्पित किया जाएगा।
समारोह के तीसरे दिन कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की स्मृति में आत्मिक पुष्पांजलि एवं भावांजलि के आयोजन में अविनाश व्यास, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, सुनील बोड़ा, डॉ. नरसिंह बिन्नाणी, श्रीमती इन्द्रा व्यास, जुगल किशोर पुरोहित, डॉ. नमामि आचार्य, क़ासिम बीकानेरी, रामसहाय हर्ष, गिरिराज पारीक, प्रशांत जैन, दिनेश सोलंकी, अशोक सैन ‘पप्पू जी’, सुशील छंगाणी, हरिनारायण आचार्य, बी.एल. नवीन, गोपाल कुमार व्यास ‘कुण्ठित’, शंकर शेखर आचार्य, मदन जैरी, प्रेम नारायण व्यास, नवनीत गोपाल पुरोहित, तोलाराम सारण, आशीष रंगा, राहुल आचार्य, अख्तर अली, घनश्याम ओझा, पुनीत कुमार रंगा, हरिकिशन व्यास, जितेन्द्र शर्मा, घनश्याम साध, रमेश मोदी, रमेश व्यास, हरीश बी. शर्मा, राजेश ओझा, मीनाक्षी जोशी, अशोक शर्मा, भवानी सिंह, नवनीत व्यास, उमेश सिंह चौहान, आनंद छंगाणी, उपेन्द्र जोशी, प्रवीण राठी, अविनाश व्यास, किशोर जोशी, लियाकत अली, महावीर स्वामी, दिनेश व्यास, सुनील व्यास, आलोक जोशी सहित विभिन्न कलानुशासनो के गणमान्यों ने कीर्तिशेष रंगा को नमन-स्मरण किया।
इस अवसर पर रंगा को अपनी आत्मिक भावांजलि अर्पित करने विशेष तौर से अंजू राव, हेमलता व्यास, राजेश्वरी व्यास, सुमन खुड़िया, श्रीमती दुर्गा, प्रीति राजपूत, इंदू व्यास, अलका रंगा, वंदना व्यास, अंजू भादाणी, अरूणा पुरोहित, राजकुमारी व्यास, अरूणा मारू, बबीता पुरोहित, मीनाक्षी व्यास, दीपिका राजपूत, ममता व्यास, यशोदा शर्मा सहित रंगा के अनेक शिष्यों ने उन्हें नमन करते हुए स्मरण किया।
समारोह का सफल संचालन वरिष्ठ शायर क़ासिम बीकानेरी एवं गिरिराज पारीक ने साझा रूप से किया एवं अंत में सभी का आभार वरिष्ठ रंगकर्मी रामसहाय हर्ष ने ज्ञापित किया।
