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बीकानेर,देश के ख्यातनाम साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा कीसमृद्ध साहित्य विरासत और परम्परा को संजोये रखना अपने आप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समाज की धरोहर है। ये उदï्गार प्रज्ञालय संस्थान एवं कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा रंगा की तीसरी पुण्यतिथि पर आयोजित ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह के तहत रंगा को समर्पित काव्य रंगत की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवियित्री इन्द्रा व्यास ने व्यक्त किए।
लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में आयोजित काव्य रंगत की अध्यक्षता करते हुए इन्द्रा व्यास ने आगे कहा कि कीर्तिशेष रंगा का काव्य-रचना संसार प्रयोगधर्मी रहा है। इस अवसर पर उन्होंने खेजड़ी को समर्पित अपनी राजस्थानी कविता का वाचन भी किया।
काव्य रंगत में राजस्थानी के वरिष्ठ कवि कमल रंगा ने कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की चर्चित राजस्थानी गज़़ल -ऊंचा घणां मकान, मिनख बावनियो हुयो/गुण पूग्या पताळ, कै अबै केवां कैने’ प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने काफी सराहा।
रंगा को समर्पित काव्य रंगत में वरिष्ठ-युवा शायर एवं कवि जाकिर अदीब, हरिशंकर आचार्य, नगेन्द्र किराडू, जुगलकिशोर पुरोहित,  मनीषा आर्य, कासिम बीकानेरी, गिरीराज पारीक, डॉ. नरसिंह बिन्नाणी, बाबूलाल छंगाणी, गंगाबिशन बिश्नोई, आनंद छंगाणी, शिव प्रकाश शर्मा, मदन जैरी, कमल रंगा, इन्द्रा व्यास आदि ने हिन्दी के सौन्दर्य, राजस्थानी की मठोठ एवं उर्दू की मिठास के साथ अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का वाचन कर काव्य रंगत को परवान चढ़ाते हुए कीर्तिशेष रंगा को शब्दांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर विशेष तौर से अविनाश व्यास ने रंगा के मित्र, देश के ख्यातनाम गीतकार, कवि हरीश भादाणी की रचनाओं का वाचन कर रंगा को अपनी भावांजलि अर्पित की। इसी कड़ी में वरिष्ठ रंगकर्मी विपिन पुरोहित, बी.एल. नवीन एवं सुरेश व्यास आदि ने अपनी काव्यात्मक श्रद्धांजलि व्यक्त की।
प्रारम्भ में सभी का स्वागत करते हुए युवा संस्कृतिकर्मी प्रेम नारायण व्यास ने समारोह के महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर हरिकिशन व्यास, महेश कुमार उपाध्याय, गोपाल कुमार व्यास ‘कुंठित’, हरिनारायण आचार्य, भवानी सिंह राठौड़, पुनीत कुमार रंगा, राहुल आचार्य, अंकित रंगा, भैरूरतन, नवनीत व्यास, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, अख्तर अली सहित उपस्थित सभी अतिथि, कवि-शायरों ने कीर्तिशेष रंगा के तेलचित्र पर पुष्पांजलि कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम का संचालन गिरीराज पारीक ने किया तथा अंत में सभी का आभार राजेश रंगा ने ज्ञापित किया।

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