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बीकानेर, पश्चिमी राजस्थान के किसानों में बाजारा उत्पादन के प्रति जागरूकता और प्रशिक्षण के उद्देश्य से एसकेआरएयू के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में शनिवार को केंद्र सरकार की अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत कृषि प्रशिक्षण एवं कृषि आदान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न गांवों के 75 किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किय।
इस दौरान किसानों को उच्च गुणवत्ता युक्त, रोग प्रतिरोधक क्षमता रखने वाली बाजरा की विभिन्न किस्मों , फसल प्रबंधन आदि के बारे में विस्तार से जानकारी देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में कुलगुरु डॉ आर बी दुबे ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान बाजारा उत्पादन के गढ़ के रूप में अपनी पहचान रखता है। यहां के किसानों के लिए बाजरे की खेती को लाभदायक बनाने हेतु कृषि वैज्ञानिकों को किसानों के साथ मिलकर समन्वित प्रयास करने होंगे। उत्तम गुणवत्ता के बीज, उर्वरकों की उपलब्धता और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्मों तक किसानों की पहुंच सुनिश्चित होने से ही क्षेत्र में बाजारा उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित हो सकेंगे। इसके लिए उन्होंने किसानों को अधिक से अधिक प्रशिक्षण दिए जाने पर बल दिया। डॉ दुबे ने कहा कि इस क्षेत्र में काचरी उत्पादन की भी व्यापक संभावनाएं हैं काचरी के बीज की मांग को देखते हुए किसानों को बीज उत्पादन के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। विश्वविद्यालय द्वारा किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
अनुसंधान निदेशक डॉ एन के शर्मा ने कहा कि बाजरा उत्पादकता बढ़ाने में नई किस्मों का विकास, फसल प्रबंधन का अहम योगदान रहा है। बाजारा अन्य मिलेट फसलों की तुलना में कम रिस्क तथा अधिक गुणवत्ता वाली फसल है। सरकार भी बाजार उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। बाजरे का बीज राज्य के बाहर से आता है ऐसे में संकर बाजरे का बीज किसान स्वयं अपने खेतों में पैदा करें तथा सीड एंटरप्रेन्योर के तौर पर युवा किसान आगे आएं।
कार्यक्रम के दौरान बाजरा उत्पादन की विभिन्न तकनीकों पर विषय विशेषज्ञ डॉ. पी. सी. गुप्ता, डॉ. भूपेन्द्र सिंह, डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. एस. पी. सिंह एवं डॉ.परमेन्द्र सिंह द्वारा किसानों को विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ बी एस नाथावत ने किया । डॉ भूपेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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