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बीकानेर, राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के वन्यजीव प्रबंधन एवं स्वास्थ्य अध्ययन केंद्र द्वारा पशु चिकित्सा अधिकारियों के लिए “वन्यजीव बचाव एवं मानव वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि पशु चिकित्सक स्थानीय निकायों के साथ सामंजस्य बैठाकर बंदर एवं सांप जैसे वन्य जीवों के रेस्क्यू एवं बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुलगुरु डॉ. सुंमत व्यास ने वन्य जीव अधिनियम की गहनता को पशु चिकित्सकों के द्वारा आमजन को लाभान्वित करने हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम में प्रथम दिवस में डॉ. ज्ञान प्रकाश ने वन्यजीवों को पकड़ने एवं सुरक्षित रूप से नियंत्रित करने की तकनीकों पर व्याख्यान दिया। डॉ. आर.के. तंवर ने वन्यजीवों से संबंधित नैतिकता और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के बारे में जानकारी दी। डॉ. अनिल कुमार ने गिद्धों के सुरक्षित हैंडलिंग एवं सुरक्षा उपायों पर व्याख्यान दिया। डी.एफ.ओ., बीकानेर श्री संदीप कुमार छलानी के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को वन्यजीवों को बेहोश करने में उपयोग होने वाली डार्ट गन के उपयोग और संचालन के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. स्पर्श दुबे ने वन्यजीवों के पुनर्वास और उसके महत्व पर व्याख्यान दिया तथा प्रो. टी.के. गहलोत ने वन्यजीवों से जुड़े विभिन्न केस स्टडी प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों को जोड़बीड़ संरक्षण रिजर्व का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ इजिप्शियन वल्चर और स्टेपी ईगल जैसे महत्वपूर्ण पक्षी देखे गए, साथ ही क्षेत्र में रॉयल स्नेक भी देखा गया। डॉ. अरविंद माथुर, उप निदेशक नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, जयपुर ने तेंदुओं से जुड़े मानव-वन्यजीव संघर्ष और उसके समाधान पर अपने अनुभवों और केस स्टडी साझा किए। डॉ. निधि राजपूत, सहायक आचार्य, स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ, नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय, जबलपुर ने वन्यजीव फॉरेंसिक विज्ञान तथा वन्यजीव अपराधों से संबंधित कानूनी पहलुओं पर व्याख्यान दिया। इस अवसर पर केन्द्र के मुख्य अन्वेषक डॉ. जे.पी. कच्छावा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का सार प्रस्तुत करते हुए इसके मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. प्रियंका राठौड़ द्वारा किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सह-अन्वेषक डॉ. एल.एन. सांखला द्वारा सभी धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

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