











बीकानेर, राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली की अनुसूचित उपयोजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति वर्ग के 30 विद्यार्थियों हेतु “बकरी पालन में व्यावसायिक अवसर” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण गुरुवार को शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि वेटरनरी के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं है विद्यार्थियों में डिग्री पाठ्यक्रम के साथ-साथ एन्टरप्रेन्योरशिप (व्यवसायिक) प्रशिक्षणों के माध्यम से उद्यमशीलता का विकास कर सकते है। इन प्रशिक्षणो से कौशल विकास करके विद्यार्थी भविष्य में सफल उद्यमी बन सकते है। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने विद्यार्थियों को जॉब सीकर की बजाय जॉब प्रोवाइडर बनने हेतु प्रेरित किया। डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि इन प्रशिक्षणो का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता का विकास करना है। ताकि भविष्य में रोजगार के विभिन्न अवसरों को समुचित उपयोग हो सके। अधिष्ठाता, वेटरनरी महाविद्यालय प्रो. बी.एन. श्रृंगी ने विद्यार्थियों को बकरी पालन को कम लागत का व्यवसाय बताते हुए कहा कि कम लागत, कम समय में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है जिसको विद्यार्थी अपनी शिक्षा के साथ-साथ तथा बाद में भी उद्यमिता के रूप में शुरू कर सकते है। निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने बताया कि प्रसार शिक्षा निदेशालय के माध्यम से विद्यार्थियों हेतु बकरी पालन, मुर्गीपालन एवं डेयरी उद्यमिता के तीन प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे है जिसमें प्रत्येक प्रशिक्षण में अनुसूचित जाति वर्ग के 30 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे है। जो कि विद्यार्थियों के उद्यमशिलता के विकास में सहायक होंगे। प्रशिक्षण के दौरान स्वागत भाषण प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. संजय सिंह ने किया एवं धन्यवाद डॉ. देवी सिंह ने किया। डॉ. पारमेष्ट विष्णु कुमार शर्मा ने विद्यार्थियो के दल का निर्देशन किया।
