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बीकानेर,अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) बीकानेर शाखा के तत्वावधान में होटल वृंदावन रिजेंसी, बीकानेर में गौर पूर्णिमा (भगवान चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव दिवस) एवं पुष्प होली महोत्सव अत्यंत भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में लगभग 300 से अधिक श्रद्धालु भक्तों एवं शहर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। संपूर्ण वातावरण “हरे कृष्ण” महामंत्र की मधुर ध्वनि से भक्तिमय हो उठा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं संकीर्तन महोत्सव
भगवान की प्रसन्नता हेतु विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं। भक्तगण सामूहिक रूप से हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन कर रहे थे और भजनों पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे। संकीर्तन की गूंज से पूरा सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में डूबकर महोत्सव का आनंद लिया।
नाट्य प्रस्तुति एवं आध्यात्मिक खेल रहे आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भव्य नाट्य प्रस्तुति एवं आध्यात्मिक खेल रहे। ISKCON Youth Forum Bikaner (IYF) के विद्यार्थियों एवं युवा व्यवसायियों ने मिलकर भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु की दिव्य लीलाओं पर आधारित प्रेरणादायक नाटक प्रस्तुत किया।
नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से महाप्रभु के जीवन, उनके सार्वभौमिक प्रेम एवं संकीर्तन आंदोलन के महत्व को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। यह संदेश दिया गया कि कलियुग में नाम-संकीर्तन ही मोक्ष का सरलतम मार्ग है।
इसके अतिरिक्त विभिन्न आध्यात्मिक खेलों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से विशेष रूप से युवा वर्ग को धर्म, संस्कृति और भक्ति से जोड़ने का प्रयास किया गया।
पंचामृत अभिषेक एवं छप्पन भोग अर्पण
इस पावन अवसर पर भक्तों ने सामूहिक रूप से गौर-निताई का पंचामृत से अभिषेक किया। तत्पश्चात भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। पुष्प होली के माध्यम से भक्तों ने भगवान के साथ आनंदपूर्वक होली खेली। पुष्प वर्षा के बीच भक्तगण कीर्तन करते हुए दिव्य आनंद का अनुभव कर रहे थे।
प्रभु संदेश
इस्कॉन बीकानेर केंद्र प्रभारी संकर्षण प्रिय प्रभु (M.Tech गोल्ड मेडलिस्ट) ने अपने संदेश में कहा कि चैतन्य महाप्रभु स्वयं राधा-कृष्ण के संयुक्त अवतार हैं —
कृष्ण चैतन्य राधा कृष्ण नहीं अन्य।”
उन्होंने बताया कि महाप्रभु कलियुग के जीवों के उद्धार के लिए अवतरित हुए हैं। वर्तमान समय में उनकी आराधना अत्यंत सरल है — केवल हरे कृष्ण महामंत्र के जप और संकीर्तन से मनुष्य भगवान की असीम कृपा का पात्र बन सकता है तथा चिंता, अवसाद, तनाव और जीवन की अनेक समस्याओं से मुक्ति पा सकता है।
महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादम् की विशेष व्यवस्था की गई। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर आध्यात्मिक संतोष का अनुभव किया।
परम पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण, भक्त-अवतार चैतन्य महाप्रभु तथा इस्कॉन के संस्थापक आचार्य ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के आशीर्वाद एवं समस्त भक्तों के सहयोग से यह महोत्सव दिव्य आनंद और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

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