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बीकानेर,शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और नवाचारों को प्रोत्साहित करने की कड़ी में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पवनपुरी दक्षिण विस्तार बीकानेर में *भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने विद्यालय में निर्बाध बिजली आपूर्ति और आधुनिक तकनीकी संसाधनों के संचालन हेतु सासंद निधि से 10 लाख रुपये की राशि सोलर इन्वर्टर सिस्टम के लिए स्वीकृत की है।
विद्यालय की प्राचार्य रचना गुप्ता ने केन्द्रीय मंत्री के निर्णय पर आभार व्यक्त करते हुए बताया कि बीकानेर की भीषण गर्मी के दौरान बिजली कटौती से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती थी। अब सोलर इन्वर्टर सिस्टम लग जाने से स्कूल को निर्बाध बिजली की उपलब्धता रहेगी। इससे न केवल पंखे और लाइटें सुचारू रूप से चलेंगी, बल्कि कंप्यूटर एवं अन्य उपकरणों का उपयोग भी बिना किसी रुकावट के हो सकेगा। उन्होंने बताया कि इस पहल से विद्यालय को भारी-भरकम बिजली बिलों से भी हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी, जिससे बचा हुआ बजट अन्य शैक्षणिक कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा।
इस सोलर कार्य की स्वीकृति में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग रहा। उनके प्रयासों से विद्यालय की इस बुनियादी समस्या को केन्द्रीय मंत्री तक पहुँचाया गया, जिस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मंत्री ने राशि जारी करने की अनुशंसा की।
डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य* ने कहा कि सरकारी विद्यालयों को आत्मनिर्भर बनाना और वहां के वातावरण को निजी स्कूलों के समकक्ष लाना प्राथमिकता में है।
विद्यालय को मिली इस बड़ी सौगात पर *शिक्षक नेता रवि आचार्य* ने केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का आभार प्रकट करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में शिक्षा के प्रति ऐसी संवेदनशीलता सराहनीय है। सोलर सिस्टम से विद्यालय पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा और विद्यार्थियों को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के प्रति जागरूक करेगा।
इस राशि से विद्यालय परिसर में उच्च क्षमता का सोलर पैनल और इन्वर्टर सिस्टम स्थापित किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। आभार व्यक्त करने वालों में विद्यालय स्टाफ, स्थानीय वार्ड प्रतिनिधि पुनीत शर्मा, जामनलाल गजरा,पूर्व मंडल अध्यक्ष नरसिंह सेवग, और गणमान्य नागरिक विनोद जोशी, नरेन्द्र जैन,शंकरलाल मोदी, कन्हयालाल सोनी,राजेंद्र शर्मा,नरेंद्र जैन,*,शामिल रहे, जिन्होंने इसे विद्यालय के कायाकल्प की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया।

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