











बीकानेर,राजकीय डूंगर महाविद्यालय बीकानेर पीजी डिपार्मेंट आफ केमेस्ट्री एवं ग्रीन केमेस्ट्री नेटवर्क सेंटर हिंदू कॉलेज युनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली एवं रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री लंदन के संयुक्त तत्वाधान में ग्रीन केमेस्ट्री इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी व विशेष रूप से भारतीय ज्ञान परंपरा के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्घाटन समारोह में विभिन्न माननीय अतिथियों का स्वागत समारोह हुआ तथा इसके बाद केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ सुरुचि गुप्ता द्वारा कॉन्फ्रेंस के बारे में संक्षिप्त में बताया गया। इसके बाद लद्दाख से आए प्रोफेसर एस के मेहता ने ग्रीन केमेस्ट्री की लद्दाख के एनवायरमेंट में उपस्थित चुनौतियों से लड़ने में उपयोगिता बताया । प्रोफेसर मेहता ने बताया की भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) विश्व की सबसे प्राचीन, सबसे विविध और गहरी जड़ों वाली बौद्धिक परंपराओं में से एक है। अपने मूल में, आईकेएस केवल प्राचीन विचारों का संग्रह नहीं है यह जीवन, प्रकृति, समाज और ब्रह्मांड को समझने का एक समग्र दृष्टिकोण है। उद्घाटन सत्र में की नोट स्पीकर महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर मनोज दीक्षित रहे । प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने अपने उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित समग्रता और एकाग्रता पर बल दिया। बताया कि मानव जीवन को विज्ञान ने लंबा तो कर दिया परंतु उसकी उपयोगिता आगे कितनी है हमें विचार करने की आवश्यकता है ।हमें भारतीय ज्ञान परंपरा से संपूर्ण मानव जाति के विकास की ओर ध्यान देना होगा इसी क्रम में उन्होंने एक पुस्तक डॉक्टर नरेंद्र भोजक को भेंट की। इसके बाद रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री लंदन नॉर्थ इंडियन ब्लॉक के सेक्रेटरी तथा जीसीएनसी हिंदू कॉलेज युनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली से आए प्रोफेसर आर के शर्मा ने ग्रीन केमेस्ट्री के विभिन्न पहलुओं पर बहुत गहन जानकारियां प्रदान की तथा बताया की आईकेएस का प्रमुख विचार यह है कि ज्ञान को जीवन की सेवा करनी चाहिए । यह मनुष्यों को स्वयं से, समाज से और प्रकृति से सामंजस्य ओर मार्गदर्शन करना चाहिए। सीखना केवल बौद्धिक उपलब्धि के लिए ही नहीं, बल्कि ज्ञान, करुणा और उत्तरदायित्वपूर्ण आचरण विकसित करने के लिए भी है। आज के दौर में, भारतीय ज्ञान प्रणाली सतत जीवन, सचेत शिक्षा और समावेशी विश्वदृष्टि की पुनर्खोज के लिए प्रेरणा देती है। यह हमें प्राचीन ज्ञान को आधुनिक नवाचारों के साथ मिलाकर एक ऐसे भविष्य का निर्माण करने के लिए आमंत्रित करती है जो प्रगतिशील होने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर भी आधारित हो। सेकंड सत्र में कॉन्फ्रेंस की एब्स्ट्रेक्ट बुक का विमोचन किया गया । राजकीय डूंगर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर राजेंद्र पुरोहित ने अपने अध्यक्षीय भाषण में विद्यार्थियों व रिसर्च स्कॉलर्स को भारतीय ज्ञान परंपरा को किस तरीके से रिसर्च शामिल करते हुए हम आगे बढ़ सकते हैं के बारे में बताया । टेक्निकल सेकंड सेशन में प्रोफेसर आरके शर्मा एवं प्रोफेसर दिग्विजय सिंह ने अपना उद्बोधन व्यक्त किया । इसी सत्र में एक ऑनलाइन क्विज का भी आयोजन किया गया । टेक्निकल सेशन प्रथम के अध्यक्ष डॉक्टर एमडी शर्मा और डॉ दिग्विजय सिंह रहे टेक्निकल सेशन सेकंड में ही प्रोफेसर एसके मेहता ने इंटीग्रेटिंग इंडियन नॉलेज सिस्टम विद मॉडर्न ग्रीन केमेस्ट्री फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर के बारे में विस्तार से बताया । टेक्निकल सेशन थर्ड में सेशन इंचार्ज डॉ रमा गुप्ता रही वही चेयर पर्सन डॉ बीके स्वामी एवं डॉ देवेश खंडेलवाल रहे । टेक्निकल सेशन थर्ड में प्रोफेसर एसके मेहता ने इंटीग्रिटी इन केमिकल साइंसेज के बारे में बताया । चतुर्थ टेक्निकल सेशन पोस्टर प्रेजेंटेशन का रहा इंडियन नॉलेज सिस्टम एवं ग्रीन केमेस्ट्री से संबंधित लगभग पचास पोस्टरों का डिस्प्ले किया गया। प्रोफेसर बूबन बनर्जी अकाल यूनिवर्सिटी तलवंडी पंजाब ने चतुर्थ टेक्निकल सेशन में अपना उद्बोधन व्यक्त किया । डॉ पुष्पा शर्मा ने सोलर बैक्टीरिया एवं डॉ कनिका सोलंकी फ्रॉम दिल्ली यूनिवर्सिटी ने नैनो स्ट्रक्चर फॉर मिशन का वॉटर पॉल्यूशन तथा प्रोफेसर गौतम कुमार मेघवंशी एसोसिएट प्रोफेसर महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर ने आमंत्रित व्याख्या दिया। कार्यक्रम के दौरान महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के रिसर्च डायरेक्टर प्रोफेसर अभिषेक वशिष्ठ कॉन्फ्रेंस के डायरेक्टर डॉ नरेंद्र भोजक कन्वीनर डॉ सत्यनारायण जाटोलिया ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री कोऑर्डिनेटर डॉक्टर भंडारी ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री उमा राठौर एवं डॉ राजाराम को कन्वीनर डॉ यादव डॉ मधुसूदन शर्मा ट्रेजरार डॉ एसके वर्मा डॉ राजेंद्र सिंह एवं राजकीय डूंगर महाविद्यालय के संकाय सदस्य एवं रिसर्च स्कॉलर भी उपस्थित रहे ।
