











बीकानेर,सनातन धर्म रक्षा समिति की ओर से पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को साध्वी ऋतंभरा ने कहा हमारे मंदिरों की आय सनातन धर्म के प्रचार पर खर्च होना चाहिए, क्योंकि आज दुनिया में सबसे ज्यादा दमन हिन्दुओं का होता है। मंदिरों में आने वाला चढ़ावा हमारी बेटियों की भलाई में लगना चाहिए। साध्वी जी ने कहा अब वो समय आ गया जब हिन्दू समाज के शिशुओं को शेर से लड़ना शुरू करना होगा। युवा कालजयी हो और बुजुर्गों को अपने धर्म के लिए अपना बिताना होगा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म अपनों से बड़ों के आशीर्वाद को दुनिया की सबसे कीमती चीज बताया। इसलिए हमें इस सबसे कीमती चीज को पाने में कंजूसी नहीं बरतनी चाहिए। हमें अपने बच्चों को भी यही सीखना चाहिए। ऐसा करके भी हम सनातन धर्म का प्रचार करेंगे। इसी धर्म में बचपन से संस्कार दिए जाते हैं। सनातन धर्म में अच्छे कर्म वाला व्यक्ति जल्द ही लोकप्रिय हो सकता है। साध्वी ने भोजन का महत्व बताते हुए कहा कि घर की रसोई तो गृहणी को खुद संभालनी चाहिए। कथा के दौरान साध्वी ने पुतना वध, नंदलाला के प्रसंग, माखन चोरी सहित दही हांडी के प्रसंग सुनाए। कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी पहुंचे। उन्होंने साध्वी की आज्ञा से एक भजन सुनाया। इससे पहले साध्वी ऋतंभरा जब पांडाल में पहुंची तब और शाम को मनोज बजाज, शैलेष गुप्ता, गजेन्द्र सिंह राठौड़, सूर्य प्रकाश शर्मा और सांगीलाल गहलोत आदि ने सपत्नीक श्रीमद्भागवत की आरती की। *28 फरवरी को महायज्ञ दोपहर 12 बजे से* 51 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ के अंतिम दिन 28 फरवरी को हवन का समय दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा। यज्ञाचार्य पंडित सिद्धार्थ पुरोहित (बाला महाराज) ने बताया कि गुरुवार को करीब 23 हजार आहुतियां दी गई। *27 को सुबह 11:30 बजे से पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में विराट हिन्दू धर्म संसद* बीकानेर। 27 फरवरी को सुबह 11:30 बजे से पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में हिन्दू धर्म संसद लगेगी। साध्वी ऋतंभरा के सान्निध्य में होने वाली इस धर्म संसद में देश भर से करीब 500 संत महात्मा शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में कई मठों के महामंडलेश्वर भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में भजन गायक प्रकाश माली, अनिल नागौरी सहित कई कलाकार शामिल होंगे। इसमें सनातन धर्म को आगे बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। इसमें उपस्थित लोग संत महात्माओं से सवाल जवाब कर सकेंगे।
