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बीकानेर,जब भारत एआई के वैश्विक इकोसिस्टम में प्रभावी भूमिका निभा रहा हो। मानव एआई की अवधारण पेश कर रहा हो। ऐसी तकनीक जो मानव निर्मित, मानव के हित में बनाई गई हो और मानवीय विकल्प पेश करती हो। इस तकनीक और ज्ञान के युग में अगर कोई “मानव बैल” बनकर जीवन जी रहा हो तो आपको जरूर आश्चर्य होगा। ऐसा मानव जीवन इस युग में बदले भारत पर सवाल बनकर खड़ा है। बन्धुओं अगर आप बीकानेर के प्रसिध्द फड़ बाजार में गए हो तो वहां आपने मानव बैल जरूर देखा होगा। जो मानव बैल गाडा हाथों से खींचकर भार ढो रहे हैं। इससे इनकी आजीविका चलती है। गुजरों में रहने वाले राजू 75 वर्ष और उसका भाई चांद 80 वर्ष पिछले 60 वर्षों से फड़ बाजार में मानव बैल बनकर भार ढोह रहे हैं।
आपका अगर फड़ बाजार में आना- जाना है तो आप उनको निश्चित ही जानते हैं. भले ही नाम से नहीं जानते हो, परन्तु एक भाई बैल की जगह गाड़ा खींचता हुआ और दूसरा भाई गाड़े को धकेलता हुआ आपको फड़ बाजार में कहीं न कहीं तो मिल ही जाएगा। आपमें भी तो मानवीय संवेदना है? तो 75 और 80 वर्ष के जर्जर शरीर वाले इन मानव बैलों को देखकर आपके मन में थोड़ी तो करूणा आएगी ही। फड़ बाजार में आज राजू और चांद से जब यह पूछा गया कि इतनी उम्र में भी वे क्यों गाड़ा खींचते हैं तो पेट पालने की मजबूरी बताते हुए कहा कि फिर भी पार नहीं पड़ती।ठ वे कपड़े की गांठे एक दुकानें से दूसरी दुकान पहुंचाते हैं। एक गांठ के मुश्किल से 10 रुपए मिलते हैं। वे बताते हैं कि वे शुरु से ही यही काम करते आ रहे हैं। खाली गाड़े में छोटा भाई राजू 75 वर्ष गाड़ा खींच रहा है और बड़ा भाई चांद ऊपर बैठा है। रोककर बातचीत करने पर गाड़े पर बैठे वयोवृध्द भाई ने पूछा भाड़ा आया है क्या? छोटे ने कहा नहीं। बड़े ने कहा चल। छोटा चलने लगा। यह जरूर कहा कि कुछ मदद कर सको तो? 100 रुपए दिए खुश होकर आशीर्वाद देते हुए गाड़ा खींचने लगा। ….यह मानवता, सहिष्णु समाज और एआई के जमाने के भारत के चांद पर ग्रहण की कालिख है। भारत सरकार और राज्य सरकार की वृध्द जनों की योजनाओं के बड़े -बड़े पोस्टर और नेताओं की उपलब्धियों और घोषणाएं पर लांछन जैसा लगता है। हम भले ही कितने ही तकनीक और ज्ञान के डंके बजा लें। यह मानव बैल समाज और सत्ता पर काला धब्बा है। यह बात इतर है कि हमारी संवेदनाएं ही चुकती हो गई हो और हम मानव बैल को देखकर भी अनदेखा कर देते हो तो इसका कोई अर्थ नहीं रह जाता।
दिल्ली एआई समिट में 70 से अधिक देशों की सहभागिता, दुनिया के दिग्गज और 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों की शिरकत से भारत की दुनिया में राजनीति, व्यापारिक और तकनीक की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। आप बीकानेर के फड बाजार में इस मानव बैल की दशा को इस उपलब्धियों के सामने खड़ा करके देख लो। दुनिया में आपकी क्या साख बच जाएगी। सुनों समाज, सुनो नेताओं और सुन लो प्रशासन। यह मानव बैल आपकी असलियत का प्रमाण बना है। कल ही चले जाओं फड़ बाजार। जजर्र मानव बैल की सुध लेनें… ?

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