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बीकानेर,जयपुर। RTE (राइट टू एजुकेशन) अधिनियम का उद्देश्य हर गरीब और वंचित बच्चे को समान शिक्षा का अधिकार देना है, लेकिन प्रदेश में यह कानून अब “कागज़ी अधिकार” बनकर रह गया है। जिस प्रकार RTE के नियम और प्रक्रिया लागू की जा रही है, उससे शिक्षा का अधिकार कम और अभिभावकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर ज्यादा लगाने पड़ रहे हैं।

संयुक्त अभिभावक संघ का स्पष्ट आरोप है कि RTE प्रवेश प्रक्रिया में फैली अव्यवस्था, भ्रम और असमंजस के लिए शिक्षा विभाग पूरी तरह जिम्मेदार है।

*आंकड़े जो सिस्टम की नाकामी उजागर करते हैं :-*

* जयपुर शहर में नगर निगमों के विलय के बाद 250 वार्ड घटाकर 150 वार्ड कर दिए गए।

* शिक्षा विभाग द्वारा आज दिनांक तक नए 150 वार्डों की प्रमाणिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई।

* हर वर्ष जयपुर में RTE के अंतर्गत लगभग 30,000 से अधिक आवेदन आते हैं।

* इनमें से करीब 40–45% अभिभावक आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर वर्ग से आते हैं, जिनके पास न तो डिजिटल संसाधन हैं और न ही प्रशासनिक जानकारी।

* पिछले सत्र में ही हजारों सीटें खाली रह गईं, जबकि जरूरतमंद बच्चे दाखिले से वंचित रह गए।

*सरकारी बैठक के निर्णयों का खुला उल्लंघन-*

नए सत्र की RTE प्रक्रिया को लेकर आयोजित आधिकारिक बैठक में संयुक्त अभिभावक संघ ने स्पष्ट रूप से यह मुद्दा उठाया था। बैठक में यह तय हुआ था कि जयपुर में अब एक ही नगर निगम होने के कारण RTE में वार्ड व्यवस्था का औचित्य समाप्त हो चुका है। स्वयं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “अब शहर का कोई भी अभिभावक किसी भी स्कूल में आवेदन कर सकता है।”
इसके बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा RTE आवेदन प्रक्रिया में वार्ड को प्राथमिकता देना न केवल बैठक के निर्णयों का उल्लंघन है, बल्कि यह अभिभावकों के साथ सीधा धोखा भी है।

BLO पर जिम्मेदारी डालकर बच नहीं सकता विभाग
संघ का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा यह कहना कि “अभिभावक बीएलओ से संपर्क कर लें” पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना बयान है।

* अधिकांश अभिभावकों को यह तक पता नहीं कि उनका बीएलओ कौन है।

* कई क्षेत्रों में एक बीएलओ पर 5,000 से अधिक मतदाता निर्भर हैं।

* गरीब मजदूर, दिहाड़ी श्रमिक और झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले अभिभावक बीएलओ को ढूंढते-ढूंढते आवेदन की समय-सीमा ही चूक जाएंगे।

* यह स्थिति RTE को “अधिकार” नहीं बल्कि “लॉटरी” बना रही है।

*प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू तीखा शब्दों में कहा कि -* “शिक्षा विभाग की लापरवाही अब आपराधिक स्तर तक पहुंच चुकी है। बिना तैयारी, बिना सूचना और बिना स्पष्टता के RTE प्रक्रिया शुरू कर दी गई। नए वार्डों की सूची आज तक सार्वजनिक नहीं की गई, ऑनलाइन कोई सरल सिस्टम नहीं बनाया गया और अब जिम्मेदारी बीएलओ पर डाल दी गई। यह सीधे-सीधे गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। RTE कोई सरकारी कृपा नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकार है। यदि शिक्षा विभाग ने तुरंत सुधार नहीं किया तो संयुक्त अभिभावक संघ को आंदोलन शुरू करने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी।”

*संयुक्त अभिभावक संघ की स्पष्ट मांगें :*

* जयपुर शहर के नए 150 वार्डों की प्रमाणिक, सरल और सार्वजनिक सूची तुरंत जारी की जाए।

* RTE आवेदन की समय-सीमा कम से कम 15 दिन बढ़ाई जाए।

* जब तक भ्रम की स्थिति समाप्त न हो, आवेदन प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से स्थगित की जाए।

* वार्ड आधारित प्राथमिकता को समाप्त कर शहर स्तर पर समान अवसर सुनिश्चित किया जाए।

संयुक्त अभिभावक संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि गरीब और जरूरतमंद बच्चों के अधिकारों की अनदेखी जारी रही, तो संघ सड़क से सदन तक संघर्ष करेगा। बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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