











बीकानेर,राष्ट्रीय कवि चौपाल की 556 वीं कड़ी साहित्य और विज्ञान को समर्पित रही रविवार के कार्यक्रम की अध्यक्षता में हास्य-व्यंग्य के वरीष्ठ कवि गौरीशंकर मधुकर मुख्य अतिथि में डॉ बसंती हर्ष विशिष्ट अतिथि में सरोज भाटी व संस्थापक सदस्य सरदार अली परिहार आदि मंचासीन हुए ।कार्यक्रम शुभारंभ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा साहित्य व विज्ञान परस्पर पूरक हैं, विचारों – नवाचारों का पुंज है साहित्य, नवाचारों का विशिष्ट प्राक्टन है विज्ञान। कार्यक्रम अध्यक्ष राष्ट्रीय स्तर के हास्य-व्यंग्य के वरिष्ठ कवि गौरीशंकर मधुकर ने शुभचिंतक पर करारे व्यंग्य कसे अब की बार तुम पड़े थे बीमार, बहुत कम थे बचने के आसार, पत्नी पति से नहीं हारती, हीरों का हार मिले तो जीत…?, मुख्य अतिथि डॉ बसंती हर्ष ने स्व धरती प्रेम को काव्य धारा में अपनी बात कही। तू क्या जाने ओ परदेसी, कैसी है बीकाणे की धरती तो वहीं विशिष्ट अतिथि इन्द्रा व्यास ने खेजड़ी संरक्षण : मरूधरा री आ संजीवणी… सान धरा रौ, मान धरा री खेजडी़, राजस्थानी खेजड़ी पर गहरी चिन्तन परक रचना सुनाई। विशिष्ट अतिथि में विराजित सरोज भाटी ने राजस्थानी भाषा रै मान्यता सारूं सुण लो, सुण लो रे आज़ राज रा धणी, आज री सत्ता रा धणी … सार भरी कविता सुनाई। सरदार अली परिहार : साहित्यकार होना भी बड़ी कृपा है भगवान की, सृजन वही कर पाएं सरस्वती हो मेहरबां भी इससे पूर्व कृष्णा वर्मा ने सरस्वती वंदना की ।
कार्यक्रम में हास्य-व्यंग्य के राष्ट्रीय स्तर के वरीष्ठ कवि ‘”गौरी शंकर मधुकर”‘ व अखिल भारतीय साहित्य परिषद की नगर अध्यक्ष “डॉ बसंती हर्ष” का राष्ट्रीय कवि चौपाल द्वारा शाल श्रीफल माल्यार्पण द्वारा आत्मीय सम्मान किया गया।
