











बीकानेर,अरजनसर के संदीप औझा ने फुलरिया दूज के शुभ अवसर पर सादगीपूर्ण विवाह कर समाज के सामने एक मिसाल पेश की। उन्होंने अपनी बारात बिना घोड़ी और डीजे के निकाली, और दहेज में मात्र एक रुपया स्वीकार किया। संदीप औझा की बारात अरजनसर से राजेरा गांव पहुंची। इस बारात में न घोड़ी थी, न डीजे का शोर-शराबा और न ही कोई अन्य दिखावा। पूरी बारात सादगी और पारंपरिक तरीके से गांव की गलियों से गुजरी। दूल्हे संदीप की इच्छा गांव में विवाह करने की थी, जबकि दुल्हन ममता के पिता का व्यापार और निवास बीकानेर में भी है।
दहेज प्रथा के खिलाफ बढ़ती जागरूकता के बीच, दूल्हे पक्ष ने दहेज में मात्र एक रुपया, एक नारियल,शीशम की लकड़ी की चारपाई और एक टोकणी स्वीकार की। यह कदम समाज में व्याप्त दहेज प्रथा और बढ़ते आडंबर के विपरीत एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। इस अवसर पर संदीप के दादा सौहनलाल ओझा ने कहा, दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज है और संस्कार ही घर परिवार की सर्वोच्च पूंजी है। उनके इस कथन की समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने सराहना की।
ऐसे समय में जब विवाह समारोहों में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं और भव्य प्रदर्शन आम हो गए हैं, संदीप औझा की यह सादगीपूर्ण शादी समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है। यह पहल परंपरा और संस्कृति का सम्मान करते हुए नई पीढ़ी को सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देती है।
