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बीकानेर,बीकानेर शहर भाजपा जिलाध्यक्ष सुमन छाजड़े ने एक वर्ष में कमाल ही कर दिया। क्या कमाल किया यह बात सामान्य नागरिक और भाजपा के आम कार्यकर्ता नहीं बता पा रहे हैं। केवल उनके निकट रहने वाले भाजपा के पदाधिकारी या प्रदेश समिति सदस्य डा. सत्य प्रकाश आचार्य ही जानते है। ये इतना कमाल मान रहे हैं कि भाजपा के संभाग कार्यालय में उपलब्धियों पर चंग पर धमाल मचा दिया है। यह कटु सत्य है कि जनता बीच और भारतीय जनता पार्टी के आम कार्यकर्ताओं में उनके एक साल के कार्यकाल का इतना इंपेक्ट नहीं है। हालांकि सुमन छाजेड़ खुद कहती है कि उनके एक वर्ष के कार्यकाल में संगठनात्मक निर्देशों की पालना की। योजनाओं में लाभार्थी महिलाओं का सम्मेलन किया। भाजपा का स्थापना दिवस मनाया। सवाल यह है कि भाजपा की साख और सरकार के सहयोग में क्या किया? बीकानेर में भाजपा के भीतर की गुटबाजी कितनी कम हुई। इस पर जिलाध्यक्ष का कहना है कि वे कार्यक्रमों में सबको फोन करती है चाहे वो किस गुट को हो।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि यह आयोजन भाजपा के कार्यकर्ताओँ ने किया है। मैं कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देती हूं। हो सकता है कि जिलाध्यक्ष की कार्यशैली निकट रहने वाले भाजपा के पदाधिकारी जिसमें मीडिया संयोजक कमल गहलोत, देहात अध्यक्ष श्याम पंचारिया, कोजू राम सारस्वत, राजेन्द्र पंवार, कौशल शर्मा, नारायण चौपड़ा, संपत पारीक, मीना आसोपा या संगठन के अन्य पदाधिकारियों को अच्छी लगती हो, परन्तु इसमें उपलब्धियों का हिस्सा कहां है? भाजपा संगठन और जनहित में ऐसा क्या कर दिया कि जश्न मानाया जाए। यह जश्न कई सवाल खड़े करता है कि तुम मेरी वाहवाही करो, मैं तुम्हारी यानि तू मुझे चाट में तुम्हे चाटू- दोनों राजी। एक साल की शहर भाजपा जिलाध्यक्ष की उपलब्धियों का यह धमाल नेताओं की मानसिकता को इंगित करता है। जनता कितनी समस्याओं से पीडित है। पार्टी के सामने सरकार की साख और अच्छी बनाने तथा भावी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर पार्टी के समक्ष क्या चुनौतिया है? जो पार्टी के भीतर कसमसाहट चल रही है उसको संगठन के तौर पर कैसे सुधार हो सकता है। विधायकों के साथ जनहित के मुद्दों पर कैसे साथ खड़ा होकर काम किया जा सकता है ? यह बातें दिगर है। जिलाध्यक्ष ने बीकानेर में हुए दो आन्दोलनो से सरकार की साख बचाने के लिए कोई भूमिका निभाई हो। ऐसा दिखाई नहीं दिया या फिर जनता की पीडाओं को संगठन के मंच से समाधान दिलाया हो। कम से कम प्रशासन को जनहित में मोटिवेट किया हो। कोई अधिकारी जनता की नहीं सुनता तो भाजपा जिलाध्यक्ष जाकर ऐसे लोगों की आवाज बनी हो, तो यह जश्न जनता ही मनाती। इसका कोई अर्थ भी होता। अन्यथा तो अपने गीत आप ही गाते जाओं। संगठन मजबूत जश्न मानने से नहीं होगा। पार्टी संगठन से जुड़े लोगों की ऊर्जा को समाज हित में काम लगाने से होगा। तभी जनता का विश्वास जीता जा सकेगा। अगर वास्तव में ऐसा कुछ हासिल किया है तो जनता के बीच से आप ही आप आवाज उठकर उपलब्धियों का परचम फेराने लगेगा। अन्यथा जनता ऐसे आयोजनों पर तरह तरह कि टिप्पणियां ही करेगी। जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने वास्तव में ऐसा कुछ किया है तो बधाई की पात्र है। वैसे जनता और पार्टी के कार्यकर्ता धरातल का सच जानते ही है कि कितना कमाल किया है!

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