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बीकानेर,महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा अभिलेखों के संरक्षण के महत्व पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई । सर्वप्रथम मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण उपरांत एसोसिएट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने मंच से अपना स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण से हम अपने अतीत को समझकर भविष्य की दिशा तय करते हैं। अभिलेखों की सुरक्षा केवल दस्तावेज़ो की रक्षा नहीं बल्कि हमारी पहचान और हमारे अस्तित्व, सभ्यता संस्कृति के ज्ञान की रक्षा है। बीज वक्ता बीकानेर राज्य अभिलेखागार के वरिष्ठ रसायनज्ञ ऋषिराज थानवी ने बीज वक्तव्य में अपने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि एसीटोन विधि से लेमिनेशन के तहत दो फॉइल के बीच डॉक्यूमेंट को रखकर सुरक्षित किया जाता है। पुराने पीले कागज़ों वाले दस्तावेज़ो को कैल्शियम बाईकार्बोनेट के उपयोग से लंबे समय तक संधारित किया जाता है। आगे उन्होंने बताया कि माइक्रोफिल्म रीडर, एमआरडी2 कैमरा आदि नया कागज़ तैयार करने में मददगार साबित होता है तो वहीं दस्तावेजों को दीमक से बचाने हेतु आर्काइव्स के चारों तरफ एंटी टर्माइट लाइनें बिछाई जाती हैं। वर्तमान में वृहद स्तर पर जो डिजिटाइजेशन प्रक्रिया चल रही है उसके तहत जेपीईजी फॉर्मेट में रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखा जाता है।
आयोजन सचिव अतिथि शिक्षक डॉ. गोपाल व्यास ने मंच संचालन करते हुए इस कार्यशाला को इतिहास विषय में भविष्य निर्माण करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सहयोगी व रोज़गारपरक बताया। कार्यशाला के मुख्य व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों ने रोज़गार संबंधी प्रश्न पूछें जिसके उत्तर में ऋषिराज थानवी ने कहा कि इतिहास अध्ययन का भविष्य बहुत उज्ज्वल है, इसके तहत सहायक पुरालेखपाल, आर्काइवल केमिस्ट, रिसर्च ऑफिसर, म्यूज़ियम क्यूरेटर जैसे पद हासिल किए जा सकते हैं। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को राजस्थान राज्य अभिलेखागार के ब्रोशर भी बांटे गए । अंत में धन्यवाद ज्ञापन अतिथि शिक्षक भगवान दास सुथार द्वारा दिया गया। कार्यशाला में विभाग के अतिथि शिक्षक डॉ. मुकेश हर्ष, डॉ. रीतेश व्यास, डॉ. खुशाल पुरोहित, रिंकू जोशी, जसप्रीत सिंह व किरण के अलावा तेजपाल भारती शामिल रहे। कार्यशाला में 90 विद्यार्थियों ने सहभागिता निभाई।

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