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बीकानेर,सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी,बीकानेर के तत्वावधान में महाराजा नरेन्द्र सिंह ऑडिटोरियम, स्टेशन रोड में शिक्षाविद् एवं कवयित्री पूनम चौधरी के प्रथम काव्य-संग्रह पहली फुहार के विमोचन एवं सम्मान समारोह का आयोजन अत्यंत गरिमामय, सौहार्दपूर्ण एवं साहित्यिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्धजनों की उल्लेखनीय उपस्थिति में
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी, बीकानेर के अध्यक्ष नदीम अहमद नदीम ने मंच से सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं का स्वागत किया और संस्था की वैचारिक दिशा, मूल्य-आधारित सामाजिक एवं साहित्यिक सरोकारों तथा अब तक की गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता, सांप्रदायिक सौहार्द और रचनात्मक संवाद को केंद्र में रखकर निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रही है तथा साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना के निर्माण को अपना दायित्व मानती है।
इस अवसर पर कवयित्री पूनम चौधरी ने मंच से अपनी साहित्यिक यात्रा साझा करते हुए अपने लेखन के प्रारंभिक दौर, प्रेरणास्रोतों और ‘पहली फुहार’ के सृजन-क्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह काव्य-संग्रह उनके व्यक्तिगत अनुभवों, सामाजिक संवेदनाओं और मानवीय सरोकारों की सहज, सच्ची और ईमानदार अभिव्यक्ति है, जिसमें जीवन के विविध रंग और भावनात्मक उतार-चढ़ाव समाहित हैं।
समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि ‘पहली फुहार’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक सजग और संवेदनशील रचनाकार की वैचारिक यात्रा का सशक्त दस्तावेज़ है, जो पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है और समकालीन समाज से सार्थक संवाद स्थापित करता है।
मुख्य अतिथि डॉ. ब्रजरतन जोशी ने काव्य-कृति पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पूनम चौधरी की कविताओं में भावनात्मक गहराई के साथ-साथ वैचारिक संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। विशिष्ट अतिथि उर्दू लेखक अनीसुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि ‘पहली फुहार’ समकालीन हिंदी कविता में आशा, करुणा और मानवीय मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि संग्रह की कई कविताएँ नज़्म-सा आभास देती हैं, जो इसकी कलात्मकता को और प्रभावशाली बनाती हैं।
काव्य-संग्रह पर पाठकीय टिप्पणी युवा साहित्यकार इमरोज़ नदीम ने प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि यह कृति पाठक को संवेदनात्मक स्तर पर गहराई से जोड़ती है और सामाजिक यथार्थ को रचनात्मक भाषा में सामने लाती है। इसके पश्चात सम्मान-पत्र का वाचन रामसहाय हर्ष द्वारा किया गया, जिसे श्रोताओं ने गंभीरता और सराहना के साथ सुना।
वक्ताओं ने इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया कि श्रीमती पूनम चौधरी का शैक्षिक अनुभव, सतत अध्ययन और साहित्यिक अनुशासन उनकी रचनाओं को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। उनकी कविताएँ सरल और सहज भाषा में गहन अनुभूतियों की प्रभावी प्रस्तुति करती हैं, जिससे ‘पहली फुहार’ एक सशक्त, सार्थक और स्मरणीय प्रथम काव्य-संग्रह के रूप में प्रतिष्ठित होती है।
कार्यक्रम का कुशल, सुसंगठित एवं प्रभावशाली संचालन संजय श्रीमाली ने किया, जिन्होंने पूरे समारोह को सहज प्रवाह, गरिमा और समयबद्धता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न कराया। समापन अवसर पर विजय कुमार शर्मा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, साहित्यकारों, श्रोताओं एवं आयोजक टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
समारोह में फादर साजू, फादर संदीप, अरमान नदीम, रवि पुरोहित, जिज्ञासा चौधरी, एडवोकेट गिरिराज मोहता, मोहम्मद शरीफ गौरी, रोशन बाफना, विजय कुमार शर्मा, रामसहाय हर्ष, मकसूद हसन कादरी, मुफ्ती सद्दाम हुसैन, मोहम्मद शाहिद, लियाकत अली, प्यारेलाल सांगवान, भविष्य खत्री, लक्षित चौधरी, लियाकत कुरैशी, हिमांशु शर्मा, बाबूलाल बामचकरी, बुलाकी शर्मा, गंगा विशन बिश्नोई, नंदकिशोर, डॉक्टर मोहम्मद फारूक चौहान, हनुमान सारण, अनुराग गोस्वामी, असित गोस्वामी, अनूप सिंह, इसरार हसन कादरी, सुनील गज्जानी, डॉक्टर विष्णु दत्त, पी. शीतल हर्ष, प्रमोद कुमार शर्मा, राजाराम स्वर्णकार, हर्ष वर्धन सिंह सिद्दू, जगदीश ढाका, नेहा ढाका, अब्दुल रऊफ राठौर, किरण खत्री, कासिम बीकानेरी, अनुराग शर्मा सहित अनेक गणमान्य सुधीजन उपस्थित रहे, जिससे यह आयोजन एक यादगार और प्रभावशाली साहित्यिक उत्सव के रूप में स्थापित हुआ।

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