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बीकानेर, राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के पशु जैव विविधता संरक्षण केंद्र द्वारा जोड़बीड़ क्षेत्र में ‘गिद्ध संरक्षण और बचाव‘ विषय पर दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हुआ। केंद्र की प्रभारी अधिकारी डॉ. रजनी अरोड़ा के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वेटरनरी स्नातक, विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जगरूकता उत्पन्न करना था। जैव विविधता के लिए गिद्धों का संरक्षण अनिवार्य है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. रजनी अरोड़ा और केंद्र के डॉ. नरसी राम गुर्जर ने विद्यार्थियों को बताया कि गिद्ध केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि ‘प्रक्रति के सफाईकर्मी‘ हैं। ये मृत पशुओं के अवशेषों का निस्तारण कर पर्यावरण को महामारी और संक्रमण से मुक्त रखते हैं, गिद्धों के बिना हमारा पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो सकता है, इसलिए इनका संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रशिक्षण के दौरान उप वन संरक्षक, बीकानेर वन्य जीव विभाग संदीप कुमार चलानी एवं अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एनवायरमेंट द बैंगलोर प्रोजेक्ट एसोसिएट शुभम कलवानी ने विद्यार्थियों को जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षण क्षेत्र का फील्ड भ्रमण करवाया। इस दौरान विद्यार्थियों को व्यावहारिक जानकारी दी गई। भारत में पाई जाने वाली गिद्धों की सभी 9 प्रजातियों के विशिष्ट शारीरिक लक्षणों और उनकी पहचान के तरीकों को समझाया गया एव इनके गिद्धों के प्राकृतिक आवास, उनके व्यवहार, उड़ने की शैली और ब्रीडिंग पैटर्न (प्रजनन चक्र) पर विस्तार से चर्चा की गई। केंद्र की डॉ. स्नेहा चौधरी एवं डॉ गुर्जर ने घायल गिद्धों के रेस्क्यू और उनके उपचार के तकनीकी पहलुओं के बारे में भी बताया। भावी पीढ़ी को इस संरक्षण अभियान का हिस्सा बनाने के लिए केंद्र द्वारा प्रकाशित “गिद्ध संरक्षण एवं बचाव” मार्गदर्शिका वितरित की गई। दो दिवसीय कार्यक्रम में कुल 90 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

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