











बीकानेर,बीकानेर के सुप्रसिद्ध गीत-संगीत सम्राट स्व. मगन कोचर को भजनों की प्रस्तुति के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आयोजन से जुड़े जितेन्द्र कोचर ने बताया कि सभा में स्व. मगन कोचर के व्यक्तित्व का स्मरण करते हुए कोचर मंडल, वीर मंडल, जैन मंडल, आदिश्वर मंडल, महावीर मंडल, गौतम मंडल तथा सांवरलाल रंगा, हस्मुदीन, मुन्ना सरकार, जाकिर हुसैन एवं उनके अनेक शिष्यों ने भजनों की प्रस्तुति दी। वक्ताओं ने कहा कि स्व. मगन कोचर ने कभी भी पुरस्कार या सम्मान को महत्व नहीं दिया, बल्कि संगीत को ही अपनी आराधना माना। उन्होंने अनेक शिष्यों को संगीत की शिक्षा दी और उन्हें जीवन मूल्यों का पाठ भी पढ़ाया। स्व. मगन कोचर का निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्र कोचर ने बताया कि सभा में बसंत नौलखा, निर्मल धारीवाल, कुनाल कोचर, धनपत कोचर, सुशील बच्छावत, सुरपत बोथरा, सुरेश बैद, विमल कोचर, विनोद दस्साणी, सोहनलाल कोचर, ऋषभ सेठिया, सुरेन्द्र खजांची, मोहन सुराना, महेन्द्र कोचर, सुनील पारख, विनोद सेठिया, कविन्द्र कोचर, अमित डागा, लखपत कोचर सहित अनेक सामाजिक बंधुओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन जितेन्द्र कोचर ने किया। विगत कुछ दिन पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने स्व. मगन कोचर के निवास पर पहुंचकर स्व. कोचर द्वारा गाये भजनों को गाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
*2010 में गीत-संगीत सम्राट की मिली थी उपाधि*
स्व. रिखबदास कोचर के सुपुत्र स्व. मगन कोचर ने जीवनभर निस्वार्थ भाव से कला की साधना की। उन्होंने देश के कोने-कोने में अपने गीत-संगीत की प्रस्तुतियों के माध्यम से बीकानेर और राजस्थान का नाम रोशन किया। वे हजारों गीतों के रचयिता थे तथा लगभग सभी वाद्ययंत्रों पर उनकी अद्भुत पकड़ थी। वर्ष 2010 के चातुर्मास के दौरान गच्छाधिपति आचार्यश्री धर्मधुरंधरजी महाराज द्वारा उन्हें गीत-संगीत सम्राट की उपाधि से सम्मानित किया गया। सर्वधर्म समभाव के प्रतीक स्व. कोचर ने गुरु भक्ति के साथ-साथ बाबा रामदेव, भैरुनाथ बाबा, हनुमानजी, भोलेनाथ सहित अनेक देवी-देवताओं पर भजन रचे और उनका सजीव गायन किया।
