











बीकानेर,वैदिक परंपरा, संस्कार शिक्षा एवं शुद्ध कर्मकांड पद्धति के प्रसार हेतु राजस्थान संस्कृत अकादमी के तत्वावधान में तथा ऋग्वेदीय राका वेद पाठशाला के संयुक्त सहयोग से आयोजित 21 दिवसीय निःशुल्क कर्मकांड प्रशिक्षण शिविर का आज गोगा गेट बाहर स्थित ऋग्वेदी ब्राह्मण गायत्री मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगलाचार के साथ विधिवत् शुभारम्भ हुआ। यह शिविर माघ महोत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारम्भ छात्रा अंशु शर्मा एवं हुनर शर्मा द्वारा गणेश वंदना से किया गया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमोद मिश्रा (प्राचार्य, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय) ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय आयुर्वेद केवल औषधि विज्ञान नहीं बल्कि मंत्र, यज्ञ और संस्कार आधारित समग्र चिकित्सा पद्धति भी है। कर्मकांड के अंतर्गत मंत्र चिकित्सा रोग-निदान एवं मानसिक शुद्धि का प्रभावी माध्यम है। मंत्रों का शुद्ध उच्चारण एवं विधिपूर्वक क्रियात्मक प्रयोग प्रत्येक व्यक्ति को सीखना चाहिए। अकादमी का यह प्रयास सराहनीय है कि सभी आयुवर्ग के लोगों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
विशिष्ट अतिथि ताराचंद रेप्सवाल (प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, रानीबाजार) ने कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है। इसके बिना भारत की संस्कृति, दर्शन और आध्यात्मिक परंपरा की कल्पना संभव नहीं है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पाठशाला के प्राचार्य शास्त्री पं. गायत्री प्रसाद शर्मा ने संस्कृत के महान आचार्य एवं महाकवि महाकवि माघ के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महाकवि माघ का जन्म राजस्थान की पावन भूमि भीनमाल में हुआ, जो प्राचीन काल में संस्कृत विद्या का प्रमुख केंद्र रहा है। उनका महाकाव्य शिशुपालवधम् संस्कृत साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि माघ जैसे महापुरुषों की जन्मभूमि राजस्थान में संस्कृत एवं वैदिक परंपरा का संरक्षण करना हम सबका कर्तव्य है।
शिविर संयोजक शास्त्री पं. यज्ञ प्रसाद शर्मा ने बताया कि शिविर के प्रथम दिवस 60 प्रशिक्षणार्थियों ने पंजीयन कराया। गणेश एवं सरस्वती स्तोत्रों का अभ्यास कराया गया। शिविर में कर्मकांड मण्डलों एवं यज्ञ-पात्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। प्रशिक्षणार्थियों को अध्ययन हेतु “कर्मकांड दीपिका” (पं. अशोक रंगा) तथा “त्रिकाल संध्या” पुस्तक पाठशाला द्वारा वितरित की गई, जिनका 21 दिनों तक स्वाध्याय एवं पाठ कराया जाएगा।
समारोह में अतिथियों का स्वागत पुष्पमाला, शाल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया। इस अवसर पर पं. आदित्य आचार्य, ओम पुरोहित, कमल ओझा, गणेश जोशी, शिवसहाय जोहरी, शंकर धामु, सुरेश श्रीमाली, नकुल पंचारिया, निशांत शर्मा, भवानी सेवग, राकेश आसोपा, भरत दाधीच सहित अनेक विद्वान एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
यह प्रशिक्षण शिविर 25 फरवरी तक प्रतिदिन संचालित होगा, जिसमें नित्यकर्म, संध्यावंदन, पूजन-हवन विधि, षोडश संस्कार, पंचांग एवं मुहूर्त ज्ञान का सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा|
