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बीकानेर,समाज निर्माण में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करने वाला मातृ शक्ति सम्मेलन शहर के राजरंगों की बगीची में आयोजित हुआ। यह आयोजन श्री पुष्करणा प्रन्यास बीकानेर के बैनर तले हुआ जिसमें महिलाओं ने मंच पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने शादियों में बढ़ रही फिजूल खर्ची, लोक दिखावा और सामाजिक आयोजनों में घुस रही अपसंस्कृति पर भी सवाल खड़े किए। पुष्करणा सावा के मद्देनजर बीकानेर में पहली बार हुआ यह सम्मेलन जन चर्चा का विषय बन गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देवस्थान विभाग की उपयुक्त सोनिया रंग ने फिजूल खर्चे पर सवाल उठाए उन्होंने कहा कि लोक दिखावे के लिए पुष्करणा समाज में आजकल नई तरह की ऋतियां बढ़ गई है जो फिजूल खर्ची को बढ़ा रही है इससे अनेक परिवार आर्थिक संकट झेल रहे हैं हमें ऐसी फिजूल खर्ची रोकनी चाहिए उन्होंने संदर्भ में अनेक उदाहरण दिए वहीं कई सुझाव भी पेश किया। उन्होंने प्री वेडिंग के नाम पर बढ़ रही फूहड़ता को समाज के लिए कलंक बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही है डूंगर कॉलेज की प्रोफेसर अनिल अपरोहित ने कहा कि देश भर में महंगाई दिनों दिन बढ़ रही है। सोने और चांदी के भाव आसमान छूने लगे हैं। ऐसे में हमें पैसों की कद्र करनी चाहिए। हम कुरीतियों को दिनों दिन बढ़ाते जा रहे हैं जबकि हमें समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करना चाहिए। प्रोफेसर अनिला पुरोहित ने बताया कि आजकल समाज में मेहंदी व हल्दी जैसे कार्यक्रम भी बहुत खर्चीले होते जा रहे हैं इस पर लगाम लगाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारी 80 वर्षीय गवरी देवी व्यास ने व गायत्री देवी किराडू ने भी फिजूल खर्ची पर अपने स्पष्ट विचार व्यक्त किये। इन दोनों वरिष्ठ महिलाओं ने बताया कि उनकी जब शादियां हुई तो उस समय फिजूलखर्ची बिल्कुल नही थी मगर अब तो हद हो गई है। हाथकाम के बाद दुल्हन तो क्या दूल्हा भी घर की चौखट के बाहर नहीं जाता था मगर अब लड़कियां रात को ही ब्यूटी पार्लर जा रही है। यह अपसंस्कृति हमे विनाश की ओर लेकर जा रही है।
इससे पहले कार्यक्रम का संचालन करते हुए साहित्यकार डॉ कृष्णा आचार्य ने विषय प्रवर्तन किया। उन्होंने बताया कि मातृशक्ति ही समाज निर्माण में अपने अहम भूमिका निभाती आ रही है। समाज में जितने भी रीति रिवाज है उनके जनक महिलाएं हैं। यदि हम महिलाएं मिलकर इन रीति-रिवाज पर चर्चा करेगी तो इसमें कुछ कुरीतियों निकलकर सामने आ जाएगी। हमें कुरीतियों को मिटाना होगा तभी हम फिजूल खर्ची पर भी लगाम लगा पाएंगे अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा। कार्यक्रम के संयोजक राजकुमारी व्यास ने भी अपनी बात रखी और अंत में सभी का आभार ज्ञापित किया।

इन्होंने भी रखे विचार

मातृशक्ति सम्मेलन में आरती आचार्य, अर्चना थानवी, डॉ बसंती हर्ष, डॉ हर्षिता रंगा, सेनुका हर्ष, सीमा पुरोहित, वंदना, चेतना आचार्य, रचना रंगा, विजय कुमारी, माधुरी पुरोहित, सुमन ओझा, चंद्रकला आचार्य तथा प्रियंका बिस्सा ने भी बहुत ही रोचक तरीके से अपनी बात रखी।

28 दंपतियों को किया गया सम्मानित

वर्ष 1977 से पहले आयोजित हुए पुष्करणा सेवा में शादियां कर चुके 28 दंपतियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्हें शॉल मोमेंटो वास श्रीफल प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी राजेश चुरा थे। जबकि अध्यक्षता पंडित जुगल किशोर ओझा पुजारी बाबा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉक्टर एस एन हर्ष व वह स्वागताध्यक्ष के रूप में सुरेंद्र कुमार व्यास मौजूद रहे। इस कार्यक्रम के सूत्रधार प्रसिद्ध उदघोषक ज्योति प्रकाश रंगा थे। रंगा ने बताया कि कुछ साल पहले तक पुष्करणा साब बेहद कम खर्चीला था तथा प्फ़िजूलखर्ची बिल्कुल नहीं थी मगर अब दिनों दिन बढ़ती जा रही है। युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए ही यहां पर अपनी शादी के 50 वर्ष पूर्ण कर चुके दंपतियों को सम्मानित किया गया है। इससे पहले श्री पुष्करणा प्रन्यास, बीकानेर के वीरेंद्र किराडू ने विषय प्रवर्तन किया। अंत में प्रन्यास के अनिल पुरोहित ने राजरंगा बगीची ट्रस्ट का आभार ज्ञापित किया।

विवाह गीतों के दो वीडियो हुए लॉन्च

इस अवसर पर मंच पर बड़ी स्क्रीन लगाकर विवाह के दो वीडियो भी लॉन्च किए गए। पहला वीडियो “हर आयो हर आयो” था। यह जाने-माने म्यूजिक कंपोजर राज नारायण पुरोहित के निर्देशन में तैयार हुआ था। जिसमें विवाह के समय बरात आने पर जो तालोटा गया जाता है उसका वीडियो लॉन्च किया गया। इसके बाद निर्माता निर्देशक पंडित संदीप किराडू के निर्देशन में तैयार “रह गयो कुंवारों फेर” नामक कॉमेडी वीडियो लॉन्च किया गया। इस वीडियो में स्वर ऋषि पुरोहित का था। जबकि मुख्य भूमिका में श्याम सुंदर किराडू थे। इन सभी को मंच पर बुलाकर सम्मानित भी किया गया। इन दोनों कार्यक्रम के सहयोगी जगत नारायण कल्ला, राजेश चुरा, अभिजीत व्यास, संजय आचार्य, आनंद व्यास व अमित व्यास का विशेष सहयोग रहा।

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