Trending Now

बीकानेर,अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति केंद्रीय बजट 2026–27 के प्रति अपनी गहरी नाराज़गी और रोष प्रकट करती है। यद्यपि वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में पाँच बार महिलाओं का उल्लेख किया, लेकिन देश की बहुसंख्यक महिलाओं की वर्तमान दयनीय स्थिति पर इस बजट में लगभग कोई ध्यान नहीं दिया गया है। कुल नाममात्र व्यय में की गई मामूली वृद्धि घरेलू महँगाई दर के कारण निष्प्रभावी हो गई है, जिससे यह बजट पहले से ही संकुचित बजट बन जाता है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बजट को कुल बजटीय व्यय के 0.53 प्रतिशत से घटाकर मात्र 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के आवंटन में की गई यह मामूली घट-बढ़ देश की महिलाओं के जीवन और आजीविका से जुड़ी समस्याओं के प्रति सरकार की पूर्ण उपेक्षा को दर्शाती है।
लैंगिक बजट में गिरावट और आँकड़ों का विश्लेषण
लैंगिक बजट के अनुमान वास्तविक संदर्भ में सकल घरेलू उत्पाद के 1.61 प्रतिशत से गिरकर 1.38 प्रतिशत रह गए हैं और नाममात्र रूप में 51,144 करोड़ रुपये की कमी दर्शाते हैं। यह महिलाओं के साथ गंभीर अन्याय है, जबकि देश के सभी आँकड़े उनके अभाव और वंचना को स्पष्ट रूप से उजागर करते हैं।
भाग ‘क’ (पूर्णतः महिला-उन्मुख योजनाएँ): सकल घरेलू उत्पाद का केवल 0.30 प्रतिशत
भाग ‘ख’ और ‘ग’ (महिला भागीदारी 30 प्रतिशत से कम या अधिक): सकल घरेलू उत्पाद का 1.08 प्रतिशत
मुख्य वृद्धि भाग ‘ग’ में की गई है, जहाँ महिलाओं के लिए आवंटन 30 प्रतिशत से भी कम है। इसे 24,299.97 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 29,777.94 करोड़ रुपये किया गया है, जो अत्यंत अपर्याप्त है।
यह स्थिति महिला-उन्मुख योजनाओं और लैंगिक न्याय के प्रति सरकार की कमजोर प्रतिबद्धता को उजागर करती है।
योजनाओं में कटौती और सुरक्षा की उपेक्षा
वित्त मंत्री ने खानाबदोशों, युवाओं, गरीबों और महिलाओं के प्रति प्रतिबद्धता जताई, किंतु बजट में इसका कोई ठोस प्रतिबिंब नहीं दिखाई देता। विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए छात्रावास तथा महिला नेतृत्व वाले उद्यमों का उल्लेख किया गया, और प्रयोगशालाओं में देर तक काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा की चिंता जताई गई, परंतु देश में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों पर पूर्ण चुप्पी साध ली गई।
अत्यंत चिंताजनक तथ्य यह है कि ‘संबल’ योजना, जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, एकल सहायता केंद्र, नारी अदालत और महिला सहायता सेवा शामिल हैं, का आवंटन 629 करोड़ रुपये से घटाकर 627 करोड़ रुपये कर दिया गया है। महँगाई को ध्यान में रखने पर यह कटौती और भी गंभीर हो जाती है।
इसके अतिरिक्त कई महत्वपूर्ण योजनाओं में भी कटौती की गई है, जिनमें कृषि विकास, पोषण, विद्यालय शिक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा और आवास से जुड़ी योजनाएँ शामिल हैं।
खाद और खाद्य सहायता में कटौती से किसानों की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा दुष्प्रभाव कृषि में आत्मनिर्भर रूप से कार्य कर रही महिलाओं पर पड़ेगा।
बाल विकास, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य महिला-केंद्रित योजनाओं के बजट में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
ऋणग्रस्तता और श्रम का प्रश्न
बजट में ‘लखपति दीदी’ योजना की सफलता का हवाला देते हुए महिला स्व-सहायता उद्यम केंद्र का मॉडल प्रस्तुत किया गया है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति इस पर गहरी चिंता व्यक्त करती है, क्योंकि हमारे सर्वेक्षण बताते हैं कि बड़ी संख्या में महिलाएँ सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के कर्ज के जाल में फँसी हुई हैं। बजट में नए वित्तीय प्रयोगों का कोई स्पष्ट खाका नहीं है, जिससे महिलाओं की ऋणग्रस्तता और बढ़ने की आशंका है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को नए रूप में प्रस्तुत किया गया है। वास्तविक व्यय की तुलना में इस वर्ष का आवंटन केवल कागजी वृद्धि है, जिससे रोजगार सुरक्षा मजबूत नहीं होती।
ग्रामीण आजीविका मिशन के बजट में की गई वृद्धि महँगाई के अनुपात में वास्तव में कटौती के समान है।
स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र की उपेक्षा
राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार महिलाओं में रक्ताल्पता एक गंभीर समस्या है, किंतु प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। कैंसर और मधुमेह की दवाओं में घोषित राहत महिलाओं की व्यापक स्वास्थ्य समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है।
वित्त मंत्री ने देखभाल से जुड़े कार्यों के प्रशिक्षण की बात कही, लेकिन महिलाओं पर लगातार बढ़ रहे अवैतनिक देखभाल कार्य के बोझ को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया। बजट भाषण में श्रम शब्द का उल्लेख तक नहीं किया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के बजट में भी कटौती या ठहराव स्पष्ट है।
यह बजट महिलाओं की वास्तविक स्थिति की अनदेखी करता है, उनकी माँगों का अपमान करता है और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं के लिए आवंटन में कटौती करता है।
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति इस महिला-विरोधी बजट का कड़ा विरोध करती है और इसके खिलाफ व्यापक संघर्ष के लिए देश की महिलाओं से आगे आने का आह्वान करती है।

 

Author