











बीकानेर,नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित 21 दिवसीय शीतकालीन पाठयक्रम कार्यक्रम का शुभारंभ आज आईसीएआर–केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. मांगीलाल जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (आईसीएआर) द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर डॉ. सुमंत व्यास, कुलपति, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने मुख्य अतिथि डॉ. मांगीलाल जाट तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. सुमंत व्यास का औपचारिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में शुष्क बागवानी आजीविका का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरेगी। उन्होंने बताया कि शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली फल एवं सब्जी फसलें भविष्य में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेंगी। अपने भ्रमण के दौरान उन्होंने संस्थान की ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर) प्रयोगशाला का अवलोकन किया तथा अनुसंधान प्रक्षेत्र (रिसर्च फार्म) का भी दौरा किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुमंत व्यास ने अपने संबोधन में बागवानी फसलों के साथ पशुपालन के एकीकरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में पशुधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा पशुपालन के बिना प्राकृतिक खेती की कल्पना नहीं की जा सकती। डॉ. लालू प्रसाद यादव, वरिष्ठ वैज्ञानिक, पाठ्यक्रम निदेशक, शीतकालीन पाठयक्रम ने 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के नौ विभिन्न राज्यों से कृषि एवं उद्यानिकी के वैज्ञानिक एवं सहायक प्राध्यापक भाग ले रहे हैं, जो शुष्क बागवानी के विभिन्न पहलुओं पर गहन प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस अवसर पर डॉ. ए. के. पुनिया, निदेशक, राष्ट्रीय ऊँट अनुसंधान केंद्र, आईसीएआर क्षेत्रीय केंद्रों के प्रमुख, संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारीगण तथा शीतकालीन विद्यालय के प्रतिभागी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम के दौरान मंच का संचालन डॉ. दीपक कुमार सारोलिया, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा किया गया। अंत में डॉ. धुरेंद्र सिंह, प्रधान वैज्ञानिक ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
