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बीकानेर,अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA) का 14वां राष्ट्रीय सम्मेलन आज तीसरे दिन हैदराबाद के आरटीसी कल्याण मंडपम में जोश-खरोश के साथ जारी रहा। सम्मेलन के दौरान राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य महासचिव डॉ. सीमा जैन ने शिक्षा के निजीकरण और सरकारी स्कूलों को बंद करने की नीति के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया।

​डॉ. सीमा जैन ने अपने संबोधन में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ‘स्कूल मर्जर’ (विलय) के नाम पर हजारों सरकारी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह नीति विशेष रूप से गरीब, दलित और पिछड़े समुदायों की बालिकाओं को शिक्षा से वंचित करने की एक सोची-समझी साजिश है। स्कूलों के विलय और बंदी से ग्रामीण क्षेत्रों में दूरी बढ़ गई है, जिससे सुरक्षा कारणों और संसाधनों के अभाव में लड़कियों का ‘ड्रॉप-आउट’ रेट (स्कूल छोड़ने की दर) तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी स्कूलों को बंद करके शिक्षा का बाजारीकरण किया जा रहा है, जिससे शिक्षा केवल अमीर तबके तक सीमित हो जाएगी। डॉ. जैन ने तर्क दिया कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत हर बच्चे को उसके पड़ोस में शिक्षा मिलना अनिवार्य है, लेकिन ‘मर्जर’ की नीति इस अधिकार का खुला उल्लंघन है। उन्होंने राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में बंद किए गए स्कूलों के उदाहरण देते हुए कहा कि इससे महिला साक्षरता और सशक्तिकरण के प्रयासों को भारी झटका लगा है।

प्रस्ताव पेश करते हुए डॉ. सीमा जैन ने मांग की कि सरकार तुरंत स्कूलों के मर्जर और क्लोजर की प्रक्रिया पर रोक लगाए और बंद किए गए स्कूलों को पुन: संचालित करे। उन्होंने आह्वान किया कि यदि सरकार ने अपनी जन-विरोधी शिक्षा नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो जनवादी महिला समिति राजस्थान सहित पूरे देश में महिलाओं और अभिभावकों को लामबंद कर बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।

​सम्मेलन में उपस्थित देशभर के प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन किया और ‘शिक्षा बचाओ,स्कूल बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ के नारे का उद्घोष किया।

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