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बीकानेर,राष्ट्रीय कवि चौपाल की 552 वीं कड़ी गाय में सृष्टि समाय एवं गणतंत्र दिवस को समर्पित रही आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता में डॉ हरिदास हर्ष मुख्य अतिथि में परम पूज्य रामेश्वरानंद जी महाराज व गौरव सेनानी एसोसिएशन बीकाणा के अध्यक्ष कर्नल हेम सिंह जी विशिष्ट अतिथि में डॉ कविता “किरण” फालना, निर्मल कुमार शर्मा सरदार अली परिहार आदि मंचासीन हुए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व नबौद्धिक में कहा कि जगत श्रेष्ठतम कृति गाय बांधना है (यानी गौ- सेवा) तो गाय हमसे बंधती नहीं तो वैर क्यों बांधे
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ हरिदास हर्ष ने कहा कर्नल हेम सिंह जी जैसे बहादुर सैनिक बाहर से तो देश की रक्षा कर सकते हैं परन्तु आंतरिक शत्रु से कैसे निपटे चिंतन का विषय है मुख्य अतिथि परम पूज्य रामेश्वरानंद महाराज जी मुख्य उद्बोधन में कहा कि हमारे जीवन में गाय की महत्ता सर्वोपरि है, इसका दूध सम्पूर्ण औषधि व खाद सर्वोपरि है है इसके संरक्षण के लिए हमें संकल्पबद्ध रहना है, मुख्य अतिथि कर्नल हेम सिंह जी ने अपने 1971 के युद्ध पर संस्मरण सुनाते हुए कहा एक कर्तव्यनिष्ठ सैनिक के लिए भूख प्यास, सर्दी गर्मी, घर परिवार कोई मायने नहीं रखता पहले देश रहता है विशिष्ट अतिथि डॉ कविता किरण फालना ने काव्य धारा में अपनी बात कही…है गर्व अपना देश विश्व में महान है सबसे निराली इस की आन बान शान है। कोई भी जाति धर्म हो निर्धन हो या धनी, सबके लिए यहाँ समान संविधान है
विशिष्ट अतिथि निर्मल कुमार शर्मा वीरों की गाथा गाते हुए कहा..दांत सिंह के गिने वो इसके लाल हैं, सिर कटे भी धड़ लड़े ये बेमिसाल हैं, सरदार अली परिहार ने राजस्थानी काव्य माध्यम से कर्तव्य च्यूत नेताओं पर करारा प्रहार किया इससे पूर्व लीलाधर सोनी ने मां सरस्वती की वंदना की नन्हे से अद्वैत बाड़मेरा ने नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं देश भक्ति गीत सुनाकर श्रोताओं का सदन का मन मोह लिया

महेश जी बड़ गुर्जर : ओ जी म्हारा धीन धीन मोटा भाग, म्हारे पावणा पधारया सा स्वागत गीत गाकर मंच का स्वागत किया,… इसी बीच *”गौरव सेनानी एसोसिएशन बीकाणा के अध्यक्ष कर्नल हेम सिंह जी व कविता किरण फालना का शाल श्रीफल माल्यार्पण द्वारा आत्मीय सम्मान किया गया सम्मान तथा साधक द्वारा मंचासीन अतिथियों को “आचार्य निर्माता ज्ञानेश्वर” पुस्तकें भेंट की”*
पम्मी कोचर आचार्य : क्या हम स्वतंत्रत है? हिन्दू, मुस्लिम की सोच मै जकड़ा दिमाग़ हमारा।क्या हम स्वतंत्र हैं.. प्रमोद शर्मा : चल विषय को मोड़ दें, रीत सारी छोड़ दें, बूंद बूंद वेदना को रक्त में निचोड़ दें … के के व्यास : कानून बनाओ को गाय को माता मानेंगे, देश भक्ति का नाता निभाएंगे … बमचकरी : जाऊ दुनिया से तन से लिपटा तिरंगा हो… लीलाधर सोनी : अर्ज़ करू हिंदवा ने, आ गोचर बचानी है थांनें … शिव दाधीच : मात पिता ने बेटे भेजें अपने घर के आंगन से। रात रात भर जागे यारों बर्फीली चट्टानों में।। भानू प्रताप सिंह देशनोक : करणी जी थांने देख हरख उठूं, दर्शन थे देवो, बुझसी प्यास मन री नमो नमो में हो, विप्लव व्यास ने राजस्थानी भाषा में काव्य रचना की
रामेश्वर साधक : रहे सत्कर्म घनेरा…, दावा है मेरा…! उनसे.. मौत हंसकर मिलेगी…। कैलाश दान चारण गुरु बिन घोर अंधेरा जैसे मंदिर दीप बिन सूना.. राजू लखोटिया : प्रेम प्रभू का बरस रहा है बांसुरी धुन में भजन सदन का मन मोह लिया
आज के कार्यक्रम में विद्या सागर पंचारिया, बुनियाद ज़हीन, शकूर बीकाणवी, ओम प्रकाश भाटी, अद्वैत बाड़मेरा, तुलसीराम मोदी सैयद अख्तर, छोटू खां, शमीम अहमद शमीम, मनमोहन कपूर, पवन चड्ढ़ा, कृष्णा वर्मा, अनिल नाथ, ओम प्रकाश सोनी, किशनलाल सरदाना महेश कुमार हर्ष, घनश्याम सौलंकी, सिराजुद्दीन भुट्टा, शाकिर हुसैन, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले अंदाज में हास्य-व्यंग्यकार बाबू बमचकरी ने किया जबकि आभार साधक ने किया

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