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बीकानेर,गंगाशहर,उग्र विहारी तपोमूर्ति’ मुनि कमल कुमार स्वामी के आगामी 25 जनवरी को लाड़नू प्रस्थान से पूर्व गंगाशहर में ‘मंगल भावना’ समारोह की त्रिवेणी बह रही है। समारोह के तीसरे दिन आज श्रावकों के बाद संत वृंदों ने अपने अग्रगणी  मुनि प्रवर के प्रति कृतज्ञता और मंगल कामनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और मुनियों  के आत्मीय संबंधों से सराबोर नजर आया।

मौन और तपस्या की अनूठी मिसाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनि कमल कुमार जी ने कहा कि पिछले दो दिनों से श्रावक समाज और आज मुनि वृंद ने जो मंगल भावनाएं की  हैं, वह धर्म के प्रति अनुराग का प्रतीक है। उन्होंने आह्वान किया कि चातुर्मास के दौरान यहाँ जो धर्म की ज्योति जलाई गई है, उसे बुझने न दें बल्कि और अधिक जागरूकता से बढ़ाएं। उन्होंने मुनि विमल विहारी और मुनि प्रमोद कुमार को चित्त समाधि के साथ गंगाशहर में विराजते हुए संभालने  की प्रेरणा दी।

संतों ने साझा किए अनुभव

मुनि प्रबोध कुमारजी ने  कहा कि मुनि श्री कमलकुमार जी का सान्निध्य ऊर्जादायक रहा। उनके मौन प्रवास से हमने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने न केवल क्षेत्र की, बल्कि हम संतों के स्वास्थ्य और समाधि की भी पूरी सार-संभाल की। मुनि श्री प्रबोध  कुमार जी ने कहा कि साधु स्वयं मंगल होते है उनके लिए मंगल की कामना यह श्रावकों की प्रमोद भावना है। किसी के प्रति प्रमोद भावना रखना, विकास की भावना, मंगल भावना रखना कर्म निर्जरा का हेतु है।
उन्होंने कहा कि मुनि श्री कमल कुमार जी के प्रवास से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। आप अधिक समय तक मौन में रहते है, आप की मौन से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। मुनि श्री ने गांव  की सार संभाल के साथ हमारी भी बहुत सार संभाल की, हमारे स्वास्थ्य एवं चित  समाधि का पुरा ध्यान रखा।

मुनि श्री विमल विहारी जी ने कहा कि गुरु समय के ज्ञाता होते है। दूरदर्शी होते है। उन्हें मालूम हो जाता है कि कब कहा क्या आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुनि श्री कमल कुमार जी के चातुर्मास की गंगाशहर में महती आवश्यकता थी। यहाँ हमें स्वास्थ्य की दृष्टि से जरूरत थी और गांव को विशेष धर्म प्रेरणा की जरूरत थी। मुनि श्री के प्रवचनों में इतनी उपस्थिति होती है। जितनी मेंने यहाँ 25 वर्षों में नही देखी। गंगाशहर में अद्वितीय धर्म आराधना हुई।
कमल  मुनि श्री के साथ रहकर अपनी 41 तक की तपस्या की लड़ी पूरी करने वाले मुनि नमि कुमार जी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि गंगाशहर जैसी श्रद्धा और भक्ति बहुत दुर्लभ है।मुनि श्री नमि कुमार जी ने गंगाशहर को प्रेरणा देते हुए कहा कि घर परिवार में अपने से बडो़ की सेवा की भावना रखे। बडो़ के प्रति आदर भाव रखे।। परिवार में शांति का भाव रखे। यही सब अच्छा करेंगे तो सब के लिए मंगल होगा।

विदाई की बेला में गूंजी गीतिका: “गंगाणो देवे आज विदाई भारी मनां”
मुनि श्री श्रेयांस कुमार ने कहा की 15 वर्षों के प्रवास के बाद अब मेरा भी विहार होगा।  मुनिश्री कमलकुमार जी हमारी सेवा के लिए पधारे थे परन्तु इन्होने  हमें पूर्ण स्वस्थ करके अपने साथ गुरुदेव के चरणों में ले जा रहें हैं मैं इनका बहुत आभारी हूँ।
मुनि श्री श्रेयांस कुमार ने अपनी स्वर लहरियों से विदाई के क्षणों को जीवंत कर दिया। उन्होंने गीतिका के माध्यम से कहा— “भूल हुई होगी मेरे से उसे आप भूल जाना, और भूलना सिर्फ भूल को, भूल से भी हमें न भूलना।” इस अवसर पर मुनि मुकेश कुमार और दिल्ली चातुर्मास व्यवस्था समिति के महामंत्री सुखराज सेठिया ने भी मुनि श्री द्वारा की गई धर्म प्रभावना का उल्लेख किया।


पुखराज जी, सुखराज जी सेठिया का सम्मान

तेरापंथी सभा गंगाशहर के अध्यक्ष नवरतन बोथरा, मंत्री जतनलाल संचेती, महासभा संरक्षक जैन लूणकरण छाजेड़, तेरापंथ न्यास ट्रस्टी  मनोहर लाल नाहटा, तेयुप उपाध्यक्ष देवेंद्र डागा आदि कार्यकर्ताओं ने आचार्य महाश्रमण जी के दिल्ली चातुर्मास व्यवस्था समिति के महामंत्री सुखराज सेठिया साहित्यकार पुखराज सेठिया आदि दिल्ली से पधारे पदाधिकारियों का स्वागत किया।

आगामी कार्यक्रम मर्यादा महोत्सव व विहार
कल से तेरापंथ भवन गंगाशहर में दो दिवसीय ‘मर्यादा महोत्सव’ शुरू होगा। 25 जनवरी को चतुर्विध धर्मसंघ की उपस्थिति में मर्यादा महोत्सव मनाने के पश्चात मुनि श्री कमल कुमार जी ठाणा-4 लाड़नू की ओर विहार करेंगे।

आचार्य श्री की महत्वपूर्ण घोषणाएं
आचार्य महाश्रमण जी ने ‘छोटी खाटू’ से घोषणा करते हुए गंगाशहर शांतिनिकेतन सेवा केन्द्र के लिए साध्वी त्रिशला कुमारी  को एक वर्ष के लिए नियुक्त किया है। इसके साथ ही लाड़नू, बीदासर, श्रीडूंगरगढ़ और हिसार सेवा केन्द्रों के लिए भी साध्वियों की नियुक्तियों की घोषणा की गई है। लाड़नू सेवा केन्द्र में  कीर्ति लता जी , बीदासर सेवाकेन्द्र  में साध्वी प्रांजल प्रभा जी,  डुगरगढ़ सेवाकेंद्र  में लक्ष्यप्रभा जी,  व हिसार उप सेवा केन्द्र में  सम्पूर्ण यशा जी  एक वर्ष तक सेवा कार्य करेंगे।

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