












बीकानेर,वसंत पंचमी के पुनीत पर्व पर हिंदी विभाग द्वारा व्योम केंद्र में एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय साहित्य : संकल्पना और स्वरूप विषय पर हरीश बी शर्मा ने व्याख्यान दिया। स्वागत की परंपरा में हरीश बी शर्मा को हिंदी विभाग के डॉ अनिल बारिया और डॉ अनिता गोयल ने शाल और साफ पहनाकर स्वागत किया। इससे पूर्व विभिन्न विषय प्रभारियों की ओर से शर्मा का माला पहनाकर स्वागत सत्कार किया गया है। प्रारम्भ में मां शारदा के पूजन और शर्मा के स्वागत पश्चात कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए प्रोफेसर अन्नाराम शर्मा ने कहा कि हमें औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर भारतीय परंपरा से गहरे जुड़ने की महत्ती आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि हमारी दृष्टि मानववादी है जबकि पश्चिम की दृष्टि केवल व्यक्तिवादी।सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे संतु निरामया की भावना से भरी है।हमें संकुचित सोच का त्याग करते हुए उदार भाव से वसुधा परिवार का भरण पोषण करना चाहिए।भारतीय दृष्टि में जड़ और चेतन में अंतर नहीं है ।सभी एक ही तत्त्व है।हमारी सहकार की संस्कृति है जबकि पश्चिम संघर्ष की संस्कृति है।उन्होंने भुवनेश्वर और अन्य साहित्यकारों के माध्यम के उदाहरण देकर स्थापित किया कि हमारी बाधाएं भिन्न भिन्न हो सकती है लेकिन उनमें प्रवाहित भाव धाराएं एक ही है।
अतिथि व्याख्यान के मुख्य वक्ता हरीश बी शर्मा ने कहा कि हमारी परंपरा अपौरुषेय से शुरू होती है।देश और समाज के निर्माण में इस परंपरा का बड़ा योगदान है। भारतीय परंपरा में रामायण और महाभारत दोनों ही भारतीयता के भाव से भरे ग्रंथ हैं। इसका स्वरूप हमें सत्य का बोध करवाता है।
उन्होंने कि लोकमंगल भारतीय साहित्य का मूल है।पश्चिम का लिजलिजा यथार्थ हमें उत्प्रेरित नहीं करता।साहित्य ग्लैमर नहीं है।वह सबके हित के भाव का समाहार है।भारतीय संस्कृति ही ऐसी है कि जिसमें तीन सौ रामायण मिलती है।
हमें हमारे मूल ग्रंथों से परिचय गहराना होगा। अपसंस्कृति से बचते हुए सांस्कृतिक समझ का परिष्कार करना होगा।हमें जानना समझना होगा कि हमारी उपस्थिति का सच क्या है? साहित्य अपनी प्रक्रिया से हमें एक राह सुझाता है।अतः हमें अपनी परंपरा से अपना संबंध प्रगाढ़ करना है।
कार्यक्रम में छात्र छात्राओं और विभिन्न विषय के प्रभारी मौजूद रहे ।पोर समय व्योम केंद्र खचाखच भरा रहा।
कार्यक्रम में प्रो सोनू शिवा, प्रो बिंदु भसीन, प्रो राजकुमार ठठेरा,प्रो राजेंद्र खीचड़ ,डॉ.श्रीराम नायक,डॉ मनीष महर्षि,डॉ राजेंद्र सुथार,डॉ अनिल बारिया,डॉ अनिता गोयल ,डॉ रमेश पुरी,डॉ नमामीशंकर आचार्य सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ मीनाक्षी चौधरी ने किया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश पुरी ने किया।
