












बीकानेर,अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन हुए 97ओरल प्रेजेंटेशन,आज तकनीकी सत्र और एम आर राजू अवॉर्ड और युवा वैज्ञानिक पुरस्कार हुए घोषित। संयोजक डॉ अर्चना पुरोहित ने बताया कि दो दिन के इस महाकुंभ में कुल 19 आमंत्रित व्याख्यान,30 पोस्टर प्रजेंटेशन और 60 से अधिक शोधपत्रों का हुआ वाचन ।
सोमवार की शाम को महाविद्यालय के राम रंगमंच पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी हुआ।जिसमें राजस्थानी संगीत नृत्य के साथ संस्कृति मंच पर हुई साकार।मेहमानों ने चित्ताकर्षक प्रस्तुतियों को सराहा।
आज दूसरे दिन प्रथम सत्र मे पांच शोधपत्रों का वाचन हुआ।
संगोष्ठी के निदेशक डॉ कैलाश स्वामी ने बताया कि मनिपाल से डॉ कमलेश मुंबरेकर, गांधीनगर के डॉ मेहुल दवे, कोलकता से आए डॉ उत्पल घोष, डॉ अथियामान एवं अंत मे वडोदरा के डॉ सुरेश राठी ने एक्सरे एम आर आई के अत्यधिक प्रयोग से बचने एवं डॉ दवे अलग अलग प्रकार के उच्च गुणवता वाले खाद्य पदार्थो के प्रयोग पर जोर दिया तथा प्रोबयोटिक्स को बढ़ावा देने पर बल देते हुए बताया कि इससे विकिरणों के हानिकारक प्रभावो से कैसे बचाव होता है।
डॉ उत्पाल घोष ने औलापरीब के कैंसर बचाव पर अपना विशेष शोध विश्लेषण प्रस्तुत किया।
बीकानेर मेडिकल कॉलेज के डॉ अथियामन ने विकिरण के सकारात्मक पहलुओं के साथ साथ सुरक्षित प्रयोग के बारे मे बताया।
सत्र के अंत मे वडोदरा के डॉ सुरेश राठी ने महिलाओं मे सर्वाइकल कैंसर के बचाव एवं टीकाकरण पर शोध पत्र का वाचन कर देश विदेश के दूर दराज से आए आगंतुकों को लाभान्वित किया ।
इस सत्र की अध्यक्षता डॉ कैलाश स्वामी, डॉ सुरुचि गुप्ता एवं डॉ आनंद खत्री ने की।
प्राचार्य डॉ राजेंद्र पुरोहित एवं डॉ अन्नाराम ने सभी वक्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इस वर्ष का प्रतिष्ठित एम आर राजू पुरस्कार कनिष्क व्यास को दिया गया।आयोजन में 10 युवा वैज्ञानिकों पुरस्कारों के साथ दस बेस्ट पोस्टर पुरस्कार भी प्रतिभागियों को अर्पित किए गए।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो अरुण चोगले ने कहा कि हम बहुत तेजी से संक्रामक रोगों से प्रभावित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमें नियमित रूप से इस तरह के आयोजनों के माध्यम से लाभ लेते रहना चाहिए।
समापन सत्र के विशिष्ट अतिथि प्रो जयसिंहम ने कहा किसीएच जागरूकता का पहला और सबसे महत्त्वपूर्ण चरण है। हमें निरंतर सजग रहते हुए इसके कारणों की यह में जाकर इससे निजात पाने की कोशिश करनी होगी।
अंतिम सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर एम एम सक्सेना ने कहा कि
जीवन शैली में क्षेत्रीय आहार की प्रमुखता और इस संबंध में हुए अनुसंधान बहुत कारगर साबित हो रहे हैं। उन्होंने इस पर संतोष जताया कि महाविद्यालय देशज ज्ञान परंपरा के अलक्षित पक्षों पर अनुसंधान कर रहा है।प्रकृति में हो रही विकृति ही संस्कृति के लिए घातक साबित हो रही है।
प्रो राजेंद्र पुरोहित ने अपने वक्तव्य में कहा कि कैंसर से सामना करने के लिए हमें प्राचीन पद्धतियों और बताएं मार्गों का पुनरीक्षण करते हुए नवाचार के पथ पर आगे बढ़ने से सफलता मिलेगी, जिसके लिए महाविद्यालय निरंतर गतिशील है।
आज अंतिम दिन भी नवीन शोध विषयों के प्रति अध्येताओं,युवा वैज्ञानिकों ,छात्र छात्रों के बीच उत्साह का संचार देखते ही बन रहा था।
दोनों ही दिन नगर के वो जिन क्षेत्रों से जुड़ी गणमान्य एवं वरिष्ठ हस्तियां रही मौजूद रहीं।
समापन समारोह के कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन प्रो प्रताप सिंह ने किया ।
