












बीकानेर,हिंदू सनातन संस्कृति में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है! हम सब भारतीय गाय को माता मानकर उसकी पूजा करते हैं! गाय साक्षात लक्ष्मी का अवतार है, इसमें सभी देवी देवताओं का वास माना गया है! जिस घर में गोपालन होता है उस घर में सदैव श्री अर्थात लक्ष्मी विद्यमान रहती है! गौ सेवा सें सभी 33 करोड़ देवी देवताओं की सेवा का लाभ मिलता है!
किन्तु वर्त्तमान समय में गोपालन निरंतर घट रहा है जिससे अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही है! गोपालन के लिए लोगों को विशेष कर ग्रामीण जनों को प्रेरित करने के लिए शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर विशेष कार्य कर रहे हैं! विशेषज्ञों एवं अनुभवी गो वंश पलकों से चर्चा कर मंत्री मदन दिलावर ने ग्रामीण लोगों को गोपालन करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्राचीन परंपरा गांव ग्वाल को पुनः प्रारंभ करने की योजना पर कार्य शुरू किया है!
आजादी से पूर्व तक बल्कि यह कहे की वर्तमान सें दो-तीन दशक पूर्व तक पूरे भारत में ग्रामीण अंचल में यह परंपरा प्रचलन में थी! गांव की सभी गोवंश को गांव का ही व्यक्ति एक साथ ले जाता था और दिन भर गायों को चारा कर संध्या काल मे वापस गांव मे ले आता था! और सभी गाय अपने – अपने घर पहुंच जाती थी! प्रतिदिन यही क्रम रहता था! इस कार्य के बदले गौ पालक उस गाय चराने ले जाने वाले को गेहूं दिया करते थे! जिससे उसके परिवार का भी ठीक सें लालन- पालन हो सके! धीरे-धीरे ग्रामीण अंचलों में यह व्यवस्था समाप्त हो गई और गायों को पालने उसे चारा पानी खिलौने जैसी व्यवस्थाओं के लिए लोगों के पास समय का अभाव होने लगा और परिणाम यह हुआ कि धीरे-धीरे लोगों ने गोवंश पालन कम कर दिया या फिर गाय पालते हैं तो उसे खुला छोड़ देते हैं! जो इधर-उधर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचती है या फिर राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर आकर दुर्घटना का शिकार बनती है! जिससे न केवल गोवंश की निर्मम मृत्यु होती है, बल्कि सड़क दुर्घटना के कारण अनेक मनुष्यों को भी अकाल मौत का शिकार होना पड़ता है!
केवल राजस्थान की ही बात करें तो सड़क पर पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मौत का आंकड़ा करोड़ों में है! जिसे रोकने अथवा काम करने की नितांत आवश्यकता है! यह तभी संभव है जब की गोवंश सड़कों पर ना आए!
गोवंश द्वारा खेतों में घुसकर फसल खराब करने से विवाद और झगड़े होते हैं जिसके कारण भी गोपालन घटा! इसके अलावा गोवंश खुला छोड़ने सें गौ तस्कर उसे चोरी छुपे उठा ले जाते है और बुचड़ खाने मे उन्हें काट दिया जाता है!
यदि इन छोटी-छोटी मुश्किलों का समाधान खोज लिया जाए तो गोवंश पालन की परंपरा को पुनर्जीवित किया जा सकता है! इसी दिशा में काम करते हुए राजस्थान सरकार के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने श्री गोवर्धन गांव ग्वाल योजना बनाने का विचार किया है!
इस योजना में हमारी ग्रामीण अंचल में प्रचलित पुरानी भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करना है! जिसके अनुसार प्रत्येक गांव में एक व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा! जो प्रतिदिन सुबह गांव की सभी गायों को एकत्रित करेगा और उन्हें चराने के लिए चारागाह भूमि पर लेकर जाएगा! दिन भर चराने के बाद शाम को उन्हें लाकर वापस गांव मे छोड़ेगा! इससे गोपालकों को गायों को चराने की समस्या से निजात मिलेगी साथ ही किसानों की फसल खराब होने का विवाद भी नहीं होगा! और क्योंकि सभी गाये एक व्यक्ति की देखरेख में चारागाह भूमि पर चरेंगी, तो उनका आवारा घूमने तथा राजमार्गों और सड़कों पर आना भी बंद हो जाएगा! परिणाम स्वरुप सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और गायों की अकाल मौत भी रोकी जा सकेगी! इस कार्य के बदले सभी गोपालक उस गांव ग्वाल को प्रति माह धनराशि भी देंगे जिससे उसके परिवार का लालन-पालन अच्छे से हो सकेगा और उसके लिए यह कार्य रोजगार का साधन बन जाएगा!
माननीय शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने इस योजना को धरातल पर उतरने के लिए कार्य प्रारंभ कर दिया है! क्योंकि समाज में साधु और संतों एवं धर्माचार्य की अच्छी पेठ होती है! लोग उनके मार्गदर्शन में कार्य करते हैं! इसका लाभ लेने के लिए और पूरे समाज को गोवंश पालन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने धर्माचार्य और साधु संतों से संपर्क कर उनका अमूल्य सहयोग मांगा है! इसके लिए मंत्री मदन दिलावर धर्माचार्य के साथ सम्मेलन कर उनको अपनी योजना की जानकारी दे रहे हैं और उन्हें इस कार्य से जुड़कर समाज परिवर्तन करने के लिए अनुरोध कर रहे हैं! इस तरह का पहला सम्मेलन गत माह जयपुर के दुर्गापुरा कृषि अनुसंधान केंद्र में आयोजित किया गया जिसमें बड़ी संख्या में राजस्थान के विभिन्न जिलों के धर्माचार्य साधु संत आचार्य शामिल हुए! सभी ने योजना की प्रशंसा करते हुए मंत्री मदन दिलावर को पूरा सहयोग देने की बात कही है! इसी प्रकार के और सम्मेलन भी आयोजित किए जाने की योजना है! ताकि समाज में गांव ग्वाला योजना को लेकर स्वीकारता बने और लोग इस योजना से जुड़े तथा गोपालन को बढ़ावा दें! इसी श्रृंखला में बागेश्वर धाम के पूज्य संत आचार्य धीरेंद्र शास्त्री जी से भी शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने उनके सात दिवसीय कथा कार्यक्रम के दौरान जिला शिवपुरी मध्य प्रदेश में भेंट की तथा संपूर्ण योजना की जानकारी देते हुए योजना का शुभारंभ करने का सादर अनुरोध किया!
अत्यंत हर्ष का विषय है की पूजनीय संत आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने मंत्री मदन दिलावर की इस योजना की प्रशंसा करते हुए शुभारंभ अवसर पर उपस्थित रहने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है! अब मंत्री मदन दिलावर अगले वर्ष जनवरी में इस योजना का शुभारंभ पूज्य संत आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के कर कमल से करने जा रहे हैं! पूज्य आचार्य धीरेंद्र शास्त्री जी द्वारा इस योजना का शुभारंभ रामगंज मंडी तहसील में एक भव्य समारोह में किया जाना प्रस्तावित है! इस अवसर पर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री जी की गोवंश विषय पर विशेष 3 दिवसीय कथा का भी आयोजन होगा! पूज्य साध्वी ऋतंभरा जी के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी है!
*समस्याएं जिनका मंत्री जी ने निकाला समाधान*
*पॉलिथीन और प्लास्टिक सें गायों की मौत*- वर्तमान समय में सिंगल यूज़ पॉलीथिन और प्लास्टिक के बने डिस्पोजल आइटम जो शादी समारोह में सामान्य रूप सें उपयोग किए जाते हैं! वह गायों की अकाल मृत्यु का बड़ा कारण बनते हैं! हम देखते हैं कि गांव – शहरों में हमारे आसपास सभी जगह बड़ी संख्या में पॉलिथीन बिखरी पड़ी रहती है और जहां शादी समारोह आयोजित होते हैं वहां प्लास्टिक के डिस्पोजल आइटम के ढेर लगे होते हैं! जिनमें बचे हुए भोजन की झूठन लगी होती है! गाय भोजन के चक्कर में इन प्लास्टिक के बने डिस्पोजल आइटमों और पॉलिथीन को खा जाती है! जो गाय के पेट में जाकर जमा हो जाती है! क्योंकि पॉलिथीन गलता नहीं है तो वह गाय के पेट में इकट्ठा होता रहता है जिससे उसकी आंत खराब हो जाती है और उसकी मौत हो जाती है!
*बर्तन बैंक बना समाधान* –पॉलिथीन और डिस्पोजल आइटम रोकने के लिए मंत्री महोदय ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में बर्तन बैंक खोल दिए हैं! इन बर्तन बैंकों में 500 से लेकर आवश्यकता अनुसार 5000 तक बर्तनों के सेट उपलब्ध होते हैं! जिसमें एक थाली, दो कटोरी, एक चम्मच, एक गिलास शामिल है! ग्रामवासी अपनी आवश्यकता अनुसार बर्तन बैंक से नाम मात्र के किराए पर इन बर्तनों को ले जाकर शादी समारोह का आयोजन कर सकते हैं और बाद में इन्हें वापस ग्राम पंचायत को जमा करा सकते है! बर्तन बैंक का यह प्रयोग राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद सफल साबित हुआ है और लोगों में बहुत लोकप्रिय है! अब गांव में लोग अपने सामूहिक प्रीतिभोज के कार्यक्रमों के लिए बर्तन बैंक सें ही बर्तन ले जा रहे है! प्लास्टिक के डिस्पोजल आइटम के उपयोग में तेजी से कमी देखी जा रही है! बर्तन बैंकों की व्यवस्था के लिए सरकार ने ग्राम पंचायतो को धनराशि भी उपलब्ध कराई है! साथ ही विधायकों को भी अपने विधायक कोष से बर्तन बैंक के लिए धनराशि देने के लिए अधिकृत किया है!
यह नवाचार करने वाला राजस्थान भारत देश का पहला राज्य बन गया है!
*चरागाहों पर अतिक्रमण*– राजस्थान में चारागाह भूमि ( गोचर भूमि ) पर अतिक्रमण एक गंभीर समस्या है!प्रदेश में स्थाई चारागाह और अन्य चारागाह भूमि लगभग 16.67 लाख हेक्टेयर है जो कुल क्षेत्रफल का लगभग 4.86 प्रतिशत है!
अतिक्रमण रोकने के लिए सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं! जिनमे अतिक्रमण हटाने,चारागाह समितियां गठित करने और नियमों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया जा रहा है! सरकार नये नियम लाने जा रही है जिसमें प्रदेश के 200 बड़े अतिकृमियों को चिन्हित किया जाएगा और उन पर अतिक्रमण की तिथि से लेकर आज तक का वर्तमान दर से किराया निकाल कर ब्याज सहित वसूल किया जाएगा! इससे न केवल वर्षों पुराने अतिक्रमण चारागाह से हटेंगे बल्कि नया अतिक्रमण करने की भी किसी की हिम्मत नहीं होगी!
*विलायती बबूल हटाओ-चारागाह बचाओ अभियान*– विलायती बबूल जूली फ्लोरा ने प्रदेश में 500 प्रकार की वनस्पतियों को समाप्त कर दिया है! गहरी जड़े होने के कारण विलायती बबूल प्रतिदिन 300 लीटर पानी सोखता है और इसके करण भूजल स्तर काफी तेजी से नीचे जाता है! इससे निकलने वाली जहरीली गैसों से बीमारियां फैलती है एवं मिट्टी भी अनुपजाऊ हो जाती है! देसी वनस्पतियों को खा रहे इस राक्षस को पूरे प्रदेश से हटाने के लिए विलायती बबूल हटाओ – चारागाह बचाओ अभियान शुरू किया गया है!
पंचायत अपने कोष से पैसा खर्च कर जूली फ्लोरा को जड़ से उखाड़ कर नष्ट कर रही हैं! जहां-जहां विलायती बबूल है वहां से उसे उखाड़ कर समूल नष्ट कर उन जगहों पर चारागाह (गोचर भूमि ) का विकास किया जा रहा है!
*गाय का वैज्ञानिक महत्व*– वैज्ञानिक शोधों से यह पता चला है कि गाय में जितनी सकारात्मक ऊर्जा होती है उतनी किसी अन्य प्राणी में नहीं है! कहते हैं की गाय की रीढ़ में स्थित सूर्यकेतु नाड़ी सर्वरोगनाशक, सर्वरोगविनाशक होती है! गाय एक मात्र ऐसा प्राणी है जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है,जबकि मनुष्य सहित सभी प्राणी ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं! इतना ही नहीं, देसी गाय के एक ग्राम गोबर में कम से कम 300 करोड़ जीवाणु होते हैं! एक तोला (10 ग्राम)गाय के घी से यज्ञ करने पर 1 टन ऑक्सीजन बनती है! पंचगव्य का निर्माण गाय के दूध, दही,घी,मूत्र,गोबर द्वारा तैयार किया जाता है,जो कि कई रोगों में लाभदायक है! कहते हैं कि एक गाय/ बैल को मारना एक मनुष्य को मारने के समान है! गाय की गोबर से बायोगैस, गोबर गैस बनाई जा सकती है! गोबर गैस प्लांट के विभिन्न पर्यावरणिय फायदे हैं! यह भी एक तथ्य है कि एक प्लांट से करीब 7 करोड़ टन लकड़ी बचाई जा सकती है जिससे करीब साढे तीन करोड़ पेड़ों को जीवन दान दिया जा सकता है! साथ ही करीब 3 करोड़ टन उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड को भी रोका जा सकता है! इतना ही नहीं गोमूत्र और गोबर फसलों के लिए बहुत उपयोगी कीटनाशक सिद्ध हुए हैं! यह भी एक तथ्य है कि एक गाय का गोबर 7 एकड़ भूमि को खाद और मूत्र 100 एकड़ भूमि की फसल को कीटों से बचा सकता है! केवल 40 करोड़ गोवंश के गोबर व मूत्र से भारत में 84 लाख एकड़ भूमि को उपजाऊ बनाया जा सकता है! इतना ही नहीं गोमूत्र में नाइट्रोजन, सल्फर,अमोनिया,कॉपर, लोह तत्व, यूरिक एसिड, यूरिया, फास्फेट, सोडियम, पोटेशियम, मैंगनीज, कार्बनिक एसिड, कैल्शियम, विटामिन ए, बी,डी,ई, एंजाइम, लैक्टोज, सल्फ्यूरिक अम्ल, हाइड्रोक्साइड आदि मुख्य रूप से पाए जाते हैं! यूरिया मूत्रल कीटाणुनाशक है! कहना गलत नहीं होगा कि गौ वंश को बचाने के लिए आज आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूर बहुत ही अहम् है!
*गोवंश का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व*– हमारे सनातन हिंदू धर्म में गोपाष्टमी पर्व को बेहद विशेष माना जाता है इस दिन भगवान कृष्ण और गौ माता की कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पूजा का विधान है! दीपावली पर हम गोवर्धन पूजा भी करते हैं! हिंदू धर्म के अनुसार गाय में 33 कोटि देवी देवता निवास करते हैं! स्वामी दयानंद सरस्वती कहते हैं कि एक गाय अपने जीवन काल में 4,10,440 मनुष्यों हेतु एक समय का भोजन जुटाती है! गुरु गोविंद सिंह जी ने कहा था, ” यही देहु आज्ञा तुर्क को खा पाऊं गौ माता का दुख सदा मै मिटाऊँ!” प्रसिद्ध मुस्लिम संत रसखान की इच्छा थी कि यदि पशु के रूप में मेरा जन्म हो तो मैं बाबा नंद की गायों के बीच में जन्म लूं! उन्होंने कहा था कि – “जो पशु हो तो कहां बसु मेरो, चरों नीत नंद की धेनु मांझारान!” महर्षि अरविंद ने कहा था कि गौ धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष की धात्री होने के कारण कामधेनु है! इसका अनिष्ट चिंतन ही प्रभाव का कारण है! पंडित मदन मोहन मालवीय की अंतिम इच्छा थी कि भारतीय संविधान में सबसे पहली धारा संपूर्ण गोवंश हत्या निषेध की बने!
गांधीजी ने कहा है कि “गोवंश की रक्षा ईश्वर की सारी मूक सृष्टि की रक्षा करना है, भारत की सुख- समृद्धि गाय के साथ जुड़ी हुई है! गाय प्रसन्नता और उन्नति की जननी है,गाय कई प्रकार से अपनी जननी से भी श्रेष्ठ है!”
