












बीकानेर,आचार्य महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी मनुयशा जी लाछुड़ा का आज पश्चिम रात्रि 3:27 मिनट पर शान्तिनिकेतन सेवा केन्द्र में देवलोकगमन हो गया था। साध्वी श्री मनुयशा जी की बैकुंठी यात्रा शान्तिनिकेतन सेवा केन्द्र से शुरू होकर गंगाशहर के विभिन्न मार्गो से होती हुई पुरानी लेन ओसवाल मुक्तिधाम पंहुची। जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
साध्वी मनुयशा जी का जन्म राजस्थान के मेवाड़ के लाछुड़ा गाँव में 31/08/1967 में हुआ। 24 जनवरी, 1996में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी से लाड़नू में साध्वी दीक्षा ग्रहण की थी। इन्होंने राजस्थान, नेपाल, बिहार, बंगाल, असम, भूटान, सिक्किम, उतरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि क्षेत्रों की यात्रा की। साध्वी श्री जी ने अपना समय जप स्वाध्याय ही बिताया।
उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि कमल कुमार जी स्वामी ने शान्तिनिकेतन पंहुच कर साध्वी जी की आत्मा के प्रति मंगलकामना प्रकट की।
तथा एक कविता के माध्यम से साध्वी जी के प्रति अपने भाव प्रकट किये। इस अवसर पर सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी विशद्प्रज्ञा जी ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि साध्वी श्री मनुयशा जी ने गठिया बीमारी को समता से सहन किया। उनोदरी तप करती थी।
साध्वी श्री लब्धियशा यशा जी ने इस अवसर पर अपनी भावनाऐं प्रकट करते हुए कहा कि साध्वी श्री मनुयशा जी उच्च मनोबल की धनी थी। अंतिम समय में भी अपने कर्मों के प्रति जागरूक थी।
साध्वी मनन यशा जी ने कहा कि हम दोनों ने एक साथ ही दीक्षित हुए थे। ओर मनुयशा जी के अंतिम समय में साथ रहने का सेवा केन्द्र गंगाशहर की चाकरी करने से सहज ही अवसर मिल गया। साध्वीवृन्द
ने गीतिकाओं के माध्यम से भाव भीनी विदाई दी।
बेंकुठी यात्रा में साध्वी जी के भतीजे जयपुर से पहुचे।गंगाशहर के सभी संस्थाओं के कार्यकर्ता व श्रावक श्राविका समाज उपस्थित हुआ। तेरापंथ सभा गंगाशहर के अध्यक्ष नवरतन बोथरा के नेतृत्व में सभी कार्यो को कुशलता से संपादित किया गया।
