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बीकानेर,जयपुर। राइट टू एजुकेशन (RTE) को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिया गया फैसला प्रदेश के लाखों अभिभावकों एवं वंचित वर्ग के बच्चों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय है। हाईकोर्ट ने अपने स्पष्ट आदेश में कहा है कि प्रदेश के सभी निजी स्कूलों को प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 1 तक, जिस भी कक्षा से स्कूल प्रवेश देता है, उसी कक्षा में RTE के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर अनिवार्य रूप से प्रवेश देना होगा।

संयुक्त अभिभावक संघ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वर्षों से निजी स्कूल संचालक आरटीई कानून की मंशा को तोड़-मरोड़ कर केवल कक्षा 1 से प्रवेश देने का बहाना बनाकर नर्सरी और प्री-प्राइमरी स्तर पर RTE से बचते आ रहे थे। हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय से अब निजी स्कूलों की मनमानी और शिक्षा विभाग की लापरवाहियों पर पूर्ण विराम लगेगा।

*संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा—* “यह फैसला केवल एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार की आत्मा की जीत है। निजी स्कूल वर्षों से गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को प्री-प्राइमरी स्तर पर शिक्षा से वंचित कर रहे थे। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि स्कूल किसी भी कक्षा में प्रवेश देता है, तो उसी कक्षा में RTE के तहत 25 प्रतिशत सीटें देना उसकी कानूनी जिम्मेदारी है। यह फैसला स्कूल माफिया की साजिशों पर करारा तमाचा है।”

अभिषेक जैन बिट्टू ने आगे कहा कि राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग को बिना किसी देरी के इस आदेश की सख्ती से पालना सुनिश्चित करनी चाहिए। जो भी निजी स्कूल RTE नियमों का उल्लंघन करे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
साथ ही उन्होंने मांग की कि नवीन सत्र 2026-27 की प्रक्रिया प्रारंभ करने से पहले सत्र 2025-26 में चयनित लेकिन अब तक दाखिले से वंचित 44,000 विद्यार्थियों का प्रवेश तत्काल सुनिश्चित किया जाए।

*संयुक्त अभिभावक संघ की प्रमुख मांगें —*

• RTE के तहत प्री-प्राइमरी से प्रवेश प्रक्रिया की स्पष्ट और लिखित गाइडलाइन जारी की जाए।

• निजी स्कूलों की सीटों एवं फीस संरचना की पारदर्शी निगरानी की जाए।

• अभिभावकों को गुमराह करने वाले निजी स्कूलों पर जुर्माना लगाया जाए एवं आवश्यकता पड़ने पर मान्यता रद्द की जाए।

• सत्र 2025-26 में RTE प्रक्रिया के अंतर्गत चयनित लगभग 80,000 विद्यार्थियों का दाखिला सुनिश्चित किया जाए, जिनमें से 44,000 से अधिक विद्यार्थी पिछले 8 माह से आज तक प्रवेश से वंचित हैं।

• कोई भी निजी स्कूल यदि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (अवमानना) की कार्यवाही की जाए।

संयुक्त अभिभावक संघ ने विश्वास जताया कि राजस्थान हाईकोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला शिक्षा व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा तथा वंचित वर्ग के बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करेगा।

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