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बीकानेर, राजकीय डूंगर महाविद्यालय में ‘नई किरण नशा मुक्ति केंद्र’ के तहत कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे की लत के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना था।
अध्यक्षता करते हुए केंद्र के संयोजक डॉ. महेंद्र थोरी ने बताया कि नशा केवल व्यक्ति के जीवन को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा, खेल और रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जीवन प्रबंध प्रशिक्षक डॉ. गौरव बिस्सा ने नशे से होने वाली सामाजिक समस्याओं, बढ़ते अपराधों, सड़क दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने नशीले पदार्थों से संबंधित मेडिकल, व्यवहारिक, मनोरोग और कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी और युवाओं से नशामुक्ति अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम संचालन सहायक आचार्य डॉ. रविकांत व्यास ने किया और नशामुक्त समाज के निर्माण में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को समझाया।
केंद्र सचिव डॉ. केशरमल ने अभियान और केंद्र द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को नशामुक्त जीवन अपनाने की शपथ दिलाई गई। डॉ. निर्मल रांकावत ने आभार प्रकट किया।

 

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