











बीकानेर,आज गीता भवन बचाओ आंदोलन का समर्थन करते हुए युवा संगठन बीकानेर द्वारा गीता भवन आंदोलन को देखते हुए बीकानेर में आज राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के नाम ज्ञापन विमल कुमार बिनावरा संजय सिंह गोपाल भादाणी, भुवनेश नागल, लक्ष्मी नारायण सुथार, गोपाल सिंह, शिव सिंह, सहित सैकड़ों लोगों ने दिया और बताया की आज से वर्षों पहले जयदयाल जी गोयन्दका ने इस गीता भवन की नींव हरि इच्छा अनुरूप रखी थी निर्माण सत्संगियों द्वारा और सत्संगियों के लिए किया गया आज भी गीता भवन में शिला लेख और मुख्य गेट की दिवारो पर बड़े-बड़े अक्षरों नाम अंकित है की गीता भवन सत्संगियो का है जिससे साफ जाहिर होता है की गीता भवन सत्संगियो यानी राम राम करने वाले उन लोगों के लिए बनाया गया है की वो एकांत में समय व्यतीत कर सके
गीता भवन की नींव रखने वाले जयदयाल गोयन्दका जी ने अपनी एक पुस्तक *भगवान कैसे मिले* मैं लिखा की गीता भवन किस उद्देश्य से बनाया गया किसके लिए बनाया गया और इसका संचालन कैसे होगा आज यहां आने वाले सत्संगी सेठ जी स्वामी जी से जुड़ा हुआ है और आते है
मगर आज के समय में गीता भवन की मैनेजमेंट कमेटी यानी ट्रस्ट यह भूल चुका है कि गीता भवन का निर्माण किस उद्देश्य से हुआ किसके लिए हुआ और क्यों हुआ इसी कारण गीता भवन जो सत्संगियों द्वारा बनाया गया उनके लिए बनाया गया आज आज इसी गीता भवन से जो सत्संगियों को प्रताड़ित करके निकाला जा रहा है गीता भवन का व्यवसाय करण हो रहा है गीता भवन सत्संग की जगह है मगर इसे पिकनिक पॉइंट बनाने के लिए अपने हित को साधते हुए कुछ लोग आतुर है
जिसमें सर्वप्रथम नाम आता है गीता भवन प्रबंधक गौतम छापरीया द्वारा सत्संगियों को प्रताड़ित किया जा रहा है जिनके लिए गीता भवन बनाया उन्हें निकाला जा रहा है
इसके साथ ही
गीता भवन एक विश्व प्रसिद्ध संस्था है इसके प्रबंधक का पद एक मर्यादित पद है जिसे भुलकर गीता भवन ट्रस्ट के लोगों के साथ मिलकर इस पद की गरीमा को तार तार कर रहा है
सेठ जी भाई जी और स्वामी जी के सपनों को चुर चुर करने में लगा हुआ है जिस गीता भवन में किसी प्रकार की सत्संगियों के लिए राशि तय नहीं थी ओनलाइन बुकिंग नहीं थी वहां आज मनमानी कर यह सब लागु कर रहा है इसके साथ इसी गौतम छापरीया के बारे में सभी ट्रस्ट के मौजूदा ट्रस्टियों को अवगत कराया गया मगर वह भी मौन व्रत धारण कर और अंधे बनकर बैठे हुए हैं पता नहीं क्यो डर रहे हैं जिसके कारण गीता भवन जैसी संस्था का नाम बदनाम हो रहा है
जब से गौतम छापरिया को गीता भवन का प्रबंधक बनाया गया है तभी से सत्संगियों के साथ अभद्रता,दुर्व्यवहार,अपमान, तिरस्कार ,मनमानी करने की शुरुआत हुई है।
गौतम छापरिया ने बहुत ही चालाकी से पूरे गीता भवन पर केवल अपना बर्चस्व कायम करने के लिए वर्षों से सेवा कार्य में संलग्न (जो उसको अपने अनुकूल नहीं लगते उन)सेवादारों को, कार्यकर्ताओ को गीता भवन से हटवा दिया।
नारायण जी अजीत सरिया जो गीता भवन के प्रबंध ट्रस्टी हैं उनके कान भरकर ,उनसे सबकी शिकायत करके , सबके लिए विपरीत माहौल बनाकर गीता भवन से निकलवा दिया।
वर्तमान में गीता भवन का संपूर्ण चार्ज गौतम छापरिया के पास है।
गीता भवन में भय और दशहत का माहौल बन गया है।
गीता भवन में स्वामीजी के समय से रहकर साधन भजन करने वाली सत्संगी माताओं ,बहनों को फर्जी नोटिस बनाकर निकालने की योजना बनाई गई है।जो गीता भवन के लिए एक दुर्भाग्य पुर्ण है
सेठजी,स्वामीजी के आह्वान पर घर परिवार एवं सांसारिक सुखों को त्याग कर अविवाहित रह कर जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गीता भवन में रहकर साधन भजन में ही बीता दिया ,ऐसे लोगों को गीता भवन छोड़ने को आज मजबूर किया जा रहा है।
और कुछ सत्संगियों पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वे लोग सत्संग काल में अपने कमरे में अन्य लोगों को रख कर किराया के रूप में धन वसूल रहे हैं और गीता भवन में रहकर बाहर व्यापार करके धन कमाते हैं,असल में कुछ कर्मचारियों के साथ वर्षों से चल रहे कानूनी विवाद की आड़ को लेकर सत्संगियों पर यह झूठा आरोप लगाया जा रहा है और वर्षों से रह रहे सत्संगियों के बारे में प्रशासनिक अधिकारियों को बताया जा रहा है कि इन लोंगों ने गीता भवन के कमरों पर कब्जा कर लिया है जिससे आने वाले नए सत्संगियों को कमरा नहीं दे पा रहे हैं
झूठ _फरेब के हाथ पांव नहीं होते ,असल में सत्संग के उद्देश्य से तो इक्का दुक्का ही आते है ज्यादातर लोग पर्यटन,घूमने_ फिरने की दृष्टि से गीता भवन आते हैं जिनसे कमरे का शुल्क लिया जाता है। पुराने वर्षों से आ रहे सत्संगियों और उनके परिवार को कमरा देने में आना कानी करते हैं, बहुत सारे कानून बताते हैं।
गीता भवन में सत्संगियों और आगंतुक यात्रियों एवं कथा एवं अन्य श्रोतों से प्राप्त सहयोग राशि का खुलकर दुरुपयोग हो रहा है। मौजूदा प्रबंधक के ऐसे अनेक गलत कार्य हैं
जिसका प्रमाण रूप में वीडियो भी वायरल हो रहे है और मौजूदा प्रशासन भी मौन है तत्काल इसे गीता भवन जैसे परम पवित्र धाम को बदनाम करने वाले इस पर कानुनी कार्यवाही हो उक्त मामले को लेकर सत्संगियों के हित में उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित हो और गीता भवन सत्संगियों के लिए बना है सत्संगियों द्वारा बनाया गया है इस गीता भवन में सत्संगी ही रुकें अन्य किसी प्रकार के लोगों को रोकने की अनुमति नहीं दें सेठ जी भाई जी और स्वामी जी के उद्देश्य से गीता भवन का संचालित हो इसका व्यवसाय करण नहीं हो जो आज हो रहा है इसे तुरंत प्रभाव से रोका जाए परिवार वाद भी रोका जाए जो आज धड़ल्ले से यहां पर चल रहा है
गीता भवन प्रबंधन और ट्रस्ट सत्संगी होना चाहिए जो इस गीता भवन का संचालन सेठ जी भाई जी और स्वामी जी के पद चिन्हों पर चलते हुए करें इसके साथ ही गीता भवन ट्रस्ट में लगभग 101 कार्यकारिणी सदस्यों को नियुक्त किया जाए जिसमें भारतवर्ष के सभी सत्संगियों को सदस्य के रूप में कार्य करने में रखा जाए
गीता भवन ट्रस्ट का कार्य करने का नियम अनुसार ट्रस्ट का चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाए सर्व सहमति से ट्रस्ट के लोगों को चुना जाए पूर्व की तरह सभी सत्संगियों को यहां रुकने की अनुमति मिले
और कमरें नये बनाने के नाम पर जिन जिन सत्संगियों से 2 लाख 50 हजार रुपए लेकर उन सत्संगियों के नाम से कमरे देने का कहा गया वह कमरे उन्हें दे
स्वामी जी महाराज के साथ रहने वाले काफी संतो को तानाशाही करके पुर्व मैं गीता भवन से निकाल दिया गया था उन सभी संतों को वापस आदर से बुलाया जाए क्योंकि गीता भवन सत्संग की जगह है यहां सत्संग किर्तन ही होने चाहिए उक्त उद्देश्य को लेकर आज राष्ट्रपति जी प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी नाम ज्ञापन भेजकर सत्संगियों के हित में गीता भवन बचाओ आंदोलन का समर्थन किया गया
