Trending Now

बीकानेर, सरदार पटेल चिकित्सा महाविद्यालय में विश्व प्रतिजैविक जागरूकता सप्ताह बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 20 नवंबर को महाविद्यालय में शिक्षकों के लिए एक सतत चिकित्सा शिक्षा सम्मेलन (सीएमई) का आयोजन किया गया, जिसमें चिकित्सा छात्रों के साथ-साथ वरिष्ठ एवं कनिष्ठ चिकित्सकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में तीन विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने-अपने विषयों पर प्रकाश डाला। शिशु रोग विभाग की डॉ. सारिका स्वामी, भेषज विज्ञान (फार्माकोलॉजी) विभाग की डॉ. राधिका विजय तथा सूक्ष्मजीव विज्ञान (माइक्रोबायोलॉजी) विभाग की डॉ. रुबिना कोचर ने प्रतिजैविकों (एंटीबायोटिक्स) के दुरुपयोग से होने वाले गंभीर दुष्परिणामों, बढ़ते प्रतिजैविक प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस-AMR) तथा इससे उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य संकट पर विस्तार से जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि प्रतिजैविक प्रतिरोध अब भारत के लिए एक बड़ा उभरता खतरा बन चुका है, जो हर साल दस लाख से अधिक लोगों की मौत का कारण बन रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा कर्मियों को और उनके माध्यम से आम जनता को इस गंभीर समस्या के प्रति जागरूक करना था, ताकि प्रतिजैविक दवाओं का उपयोग सावधानी से किया जाए और भविष्य में बढ़ते प्रतिरोध को रोका जा सके।

सीएमई का समापन जागरूकता संदेश के साथ हुआ। इसमें उचित दवा उपयोग, समय पर इलाज और जन-जागरूकता को ही प्रतिजैविक प्रतिरोध से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार बताया गया।

अतिरिक्त प्राचार्या डॉ. रेखा आचार्य एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अंजली गुप्ता ने वक्ताओं को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। सूक्ष्मजीव विज्ञान विभागाध्यक्षा डॉ. तरुणा स्वामी ने सभी प्रतिभागियों तथा आयोजन में सहयोग करने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Author