
बीकानेर,जयपुर,लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, एवीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी कमान ने आज जोधपुर में आयोजित प्रथम दक्षिणी कमान क्षेत्रीय सेना (टीए) सैन्य–नागरिक समन्वय संगोष्ठी 2025 में मुख्य वक्तव्य दिया।
यह संगोष्ठी, इस प्रकार की प्रथम पहल थी, जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों, शिक्षा, उद्योग जगत और प्रमुख विचारकों को एक साझा मंच पर लाकर सैन्य–नागरिक समन्वय को सशक्त बनाना और राष्ट्र को अधिक मजबूत, सुरक्षित एवं लचीला बनाने के प्रयासों को गति देना था।
अपने मुख्य संबोधन में सेना कमांडर ने आधुनिक युद्ध और राष्ट्रनिर्माण की जटिलताओं से निपटने में सैन्य–नागरिक सहयोग की बढ़ती श्रेष्ठता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों की सम्मिलित ताकत का उपयोग करना ही उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और नवाचार-आधारित समाधान विकसित करने की कुंजी है।
दिनभर चली इस संगोष्ठी में प्रतिष्ठित वक्ताओं ने बदलते युद्ध स्वरूप, प्रौद्योगिकी के एकीकरण तथा भविष्य की सुरक्षा अवधारणाओं को आकार देने में समाज की सामूहिक भूमिका पर विचार-विमर्श किया। सहभागी सत्रों, विचार कार्यशालाओं और क्षेत्रीय दौरों के माध्यम से उपस्थित प्रतिनिधियों को विचारों के आदान-प्रदान और व्यावहारिक रणनीतियाँ विकसित करने का अवसर मिला।
संगोष्ठी सहयोग और दूरदृष्टि की भावना के साथ आयोजित की गई, जिसने पुनः पुष्टि की कि सशस्त्र बलों, नागरिक समाज और उद्योग जगत के बीच तालमेल से राष्ट्र की शक्ति, सुगमता और प्रगति के लिए स्थायी ढाँचे बनाए जा सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन भारतीय सेना की इस अटूट प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि वह सैन्य और नागरिक समाज के बीच सेतु का कार्य करती रहेगी और राष्ट्र की सुरक्षा एवं विकास के प्रति साझा उत्तरदायित्व को सुदृढ़ बनाएगी।