








बीकानेर,राजस्थान पशु चिकित्सा और पशुविज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर के सर्जरी विभाग के चिकित्सकों, के दल द्वारा एक दस माह की मारवाड़ी घोड़ी (बछेरी) में सफल ऑपरेशन द्वारा लगभग डेढ़ किलो से अधिक भार की पथरी निकाली गई। वेटरनरी कॉलेज, बीकानेर के सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण बिश्नोई, डॉ. अनिल कुमार बिश्नोई और उनकी टीम द्वारा यह जटिल ऑपरेशन किया गया। डॉ. प्रवीण बिश्नोई ने बताया कि श्री गंगानगर के जैतसर कस्बे से अश्व पालक, दस माह की एक मारवाड़ी बछेरी लेकर आए जिसे लगभग दो महीनों से पेशाब में ख़ून आने तथा पेशाब रुकने की समस्या थी। उक्त बछेरी की रक्त संबंधी जाँच, एक्स रे और सोनोग्राफी जांच में बछेरी की पेशाब की थैली में बहुत बड़ी पथरी पाई गई। सर्जरी विभाग की टीम ने लगभग तीन घण्टे चले ऑपरेशन में बछेरी को बेहोश कर उसके ब्लेडर को चीरकर पथरी को निकाला गया। यह पथरी एक बड़े शंख के आकर की थी और 15 सेमी लंबी और लगभग आठ सेमी व्यास की थी। ऑपरेशन के बाद बछेरी को सर्जरी विभाग के इंडोर वार्ड में भर्ती किया गया जो कि बिल्कुल स्वस्थ है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ सुमन्त व्यास ने विभाग में उपचाराधिन बछेरी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और सभी चिकित्सकों को सफल ऑपरेशन की बधाई दी। प्रो. प्रवीण बिश्नोई ने बताया कि समान्यता नर पशुओं में विशेषकर गाय के बछड़ों और भैंस के पाड़ों में पथरी के कारण पेशाब में रुकावट आती है और थैली फट जाने के कारण उनका ऑपरेशन करना पड़ता है परंतु उसका कारण सर्दियों में पशुपालक द्वारा नर बछड़ों और पाड़ो को उनकी माँ का दूध ना पिलाना, पानी का कम पीना और कम उम्र में खल या चूरी खिलाना होता है, परंतु मादा पशुओं में पथरी की शिकायत कम होती है और अश्वों में तो यह समस्या और भी कम होती है। अब तक प्रकाशित रिपार्टों में वयस्क अश्वों में ही यह पाया गया है परन्तु अवयस्क बछेरी में इस प्रकार का विभाग द्वारा यह पहला सफल ऑपरेशन हुआ है। इस ऑपरेशन में प्रो. प्रवीण बिश्नोई की टीम में डॉ. अनिल कुमार बिश्नोई, डॉ. शांतनु, डॉ. बालकृष्ण, डॉ. हर्ष, डॉ. अर्जुन व विभाग के अन्य रेजिडेंट शल्य चिकित्सक शामिल रहे।
