Trending Now

बीकानेर,राजस्थानी युवा लेखक संघ एवं प्रज्ञालय संस्थान द्वारा आगामी 21 फरवरी, 2026 को विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर हर वर्ष की तरह राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता एवं प्रदेश की दूसरी राजभाषा बाबत के साथ नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक स्तर पर राजस्थानी भाषा शिक्षा का माध्यम बने। इन महत्वपूर्ण मांगों के समर्थन में हमेशा उक्त दिवस पर विभिन्न तरह के अहिंसात्मक आंदोलन के उपक्रम संस्थाओं द्वारा आयोजित होते रहे है।
राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजस्थानी मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक कमल रंगा ने बताया कि इस वर्ष भाषा मान्यता एवं शिक्षा के माध्यम के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय उपवास का आयोजन किया जाएगा।
रंगा ने आगे बताया कि दशकों से केन्द्र सरकार के यहां लंबित राजस्थान विधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित राजस्थानी भाषा संवैधानिक मान्यता के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार शीघ्र निर्णय लें, क्योंकि राजस्थानी भाषा संवैधानिक मान्यता के लिए सभी विधिक प्रावधान एवं भाषा वैज्ञानिक मानदंड पूर्ण किए हुए हैं। ऐसी स्थिति में 12 करोड़ से अधिक राजस्थानी के लोगों को उनका वाजब हक शीघ्र मिल सके।
इसी तरह राज्य सरकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत राजस्थानी को प्रदेश की दूसरी राजभाषा शीघ्र घोषित करें एवं साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा में राजस्थानी को माध्यम बनावें।
रंगा ने बताया कि राज्य स्तरीय इस उपवास कार्यक्रम के संयोजक सोजत सिटी पाली के साहित्यकार अब्दुल समद राही को बनाया गया है। राही द्वारा प्रदेश के विभिन्न कलानुशासन के लोगों को इस उपवास को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया जा रहा है। इसी तरह बीकानेर स्तर पर सहसंयोजक वरिष्ठ शायर क़ासिम बीकानेरी एवं कवि गिरिराज पारीक द्वारा भी संयुक्त रूप से उपवास हेतु व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया जा रहा है।

Author