













बीकानेर,भारत में शिक्षा को हमेशा भविष्य निर्माण का माध्यम माना गया, लेकिन आज वही शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार, लापरवाही और राजनीतिक स्वार्थ की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। देश के लाखों विद्यार्थियों का सपना बनने वाली NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा आज भरोसे के सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही है। प्रश्न केवल पेपर लीक का नहीं है, प्रश्न उस विश्वास का है जिसे देश के करोड़ों अभिभावकों और विद्यार्थियों ने शिक्षा व्यवस्था पर रखा था।
जब कोई विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करता है, परिवार अपनी जरूरतें छोड़कर कोचिंग, फीस, किताबों और हॉस्टल पर लाखों रुपए खर्च करता है, तब वह केवल परीक्षा नहीं देता, बल्कि अपने पूरे भविष्य को दांव पर लगाता है। लेकिन यदि परीक्षा से पहले ही पेपर बिक जाए, माफिया सक्रिय हो जाएं, सिस्टम चुप बैठ जाए और राजनीति केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाए, तो यह केवल परीक्षा में गड़बड़ी नहीं बल्कि देश के युवाओं के सपनों की हत्या है।
आज देश का विद्यार्थी मानसिक तनाव, अवसाद और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव पहले ही युवाओं को भीतर से तोड़ रहा था, ऊपर से पेपर लीक जैसी घटनाएं उन्हें यह महसूस करा रही हैं कि मेहनत नहीं बल्कि पहुंच, पैसा और भ्रष्ट तंत्र ही सफलता तय कर रहा है। यह स्थिति अत्यंत भयावह है। लगातार बढ़ते मानसिक तनाव के कारण कई विद्यार्थी आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। किसी भी सभ्य समाज के लिए इससे बड़ा कलंक क्या हो सकता है कि उसके बच्चे भविष्य की चिंता में अपनी जिंदगी खत्म करने लगे।
हर आत्महत्या के पीछे केवल एक विद्यार्थी नहीं मरता, उसके साथ एक परिवार टूटता है, मां-बाप की उम्मीदें टूटती हैं, भाई-बहनों का विश्वास टूटता है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि विद्यार्थियों की मौतों पर भी राजनीति चमकाई जा रही है। कोई पक्ष सरकार को दोष देकर अपनी राजनीति साध रहा है तो कोई विपक्ष को जिम्मेदार बताकर बचाव कर रहा है, लेकिन कोई भी उस विद्यार्थी के दर्द को महसूस नहीं कर रहा जिसने वर्षों की मेहनत के बाद खुद को ठगा हुआ पाया।
संयुक्त अभिभावक संघ स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता है कि NEET पेपर लीक केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि राष्ट्रीय अपराध है। इसके लिए केवल पेपर लीक करने वाले गिरोह ही नहीं, बल्कि वह पूरा तंत्र जिम्मेदार है जिसने शिक्षा को व्यापार बना दिया।
आज कोचिंग उद्योग करोड़ों-अरबों का बाजार बन चुका है। विद्यार्थियों को रैंक और पैकेज की मशीन बनाकर पेश किया जा रहा है। कई कोचिंग संस्थान बच्चों पर इतना मानसिक दबाव डालते हैं कि विद्यार्थी खुद को नंबरों की दौड़ में कैदी महसूस करने लगते हैं। शिक्षा अब ज्ञान नहीं बल्कि व्यवसाय का केंद्र बनती जा रही है।
सरकारों ने शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन सच्चाई यह है कि परीक्षा सुरक्षा, पारदर्शिता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। यदि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा सुरक्षित नहीं रह सकती तो फिर देश का आम विद्यार्थी किस व्यवस्था पर भरोसा करे?
संयुक्त अभिभावक संघ केंद्र सरकार, परीक्षा एजेंसियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पेपर लीक माफिया और शिक्षा के नाम पर व्यापार करने वाले हर गुनहगार की कड़ी निंदा करता है। यह समय केवल बयान देने का नहीं, बल्कि कठोर कार्रवाई का है।
*देश का विधार्थी और अभिभावक मांग करते हैं कि —*
• NEET पेपर लीक प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो।
• दोषियों पर केवल गिरफ्तारी नहीं बल्कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में कठोर सजा सुनिश्चित हो।
• परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए।
• विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर हेल्पलाइन और काउंसलिंग व्यवस्था मजबूत की जाए।
• कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सख्त नियंत्रण और नियमन लागू किया जाए।
• प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाया जाए।
• शिक्षा को व्यापार बनाने वाले संस्थानों और माफियाओं पर राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई हो।
देश का युवा केवल नौकरी या कॉलेज की सीट नहीं मांग रहा, वह ईमानदार व्यवस्था मांग रहा है। वह यह विश्वास चाहता है कि उसकी मेहनत का मूल्य होगा और उसका भविष्य किसी भ्रष्ट तंत्र की सौदेबाजी में बर्बाद नहीं होगा।
यदि आज भी सरकारें, प्रशासन और समाज नहीं जागा, तो आने वाला समय देश की प्रतिभाओं के पलायन, युवाओं के अवसाद और शिक्षा व्यवस्था के पतन के रूप में सामने आएगा।
यह केवल विद्यार्थियों की लड़ाई नहीं है, यह देश के भविष्य की लड़ाई है। क्योंकि जिस राष्ट्र के बच्चे निराश हो जाते हैं, उस राष्ट्र का भविष्य कभी सुरक्षित नहीं रह सकता।
