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बीकानेर,गोगा गेट के बाहर स्थित ऋग्वेदी ब्राह्मण गायत्री मंदिर में 33वें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में वेद माता गायत्री का पंचामृत से अभिषेक-पूजन किया गया तथा इसके पश्चात विराट गायत्री महायज्ञ का विधिवत आयोजन किया गया। यह संपूर्ण कार्यक्रम मंदिर के अधिष्ठाता पं. बंशी लाल शर्मा के सान्निध्य में तथा शास्त्री पं. गायत्री प्रसाद शर्मा के आचार्यत्व में वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में श्रद्धालुओं द्वारा वेदमाता गायत्री की विशेष आराधना की गई। पंचामृत अभिषेक के अंतर्गत दूध, दही, घी, शहद एवं शर्करा से वेदमाता का अभिषेक कर शुद्धिकरण, प्राणप्रतिष्ठा एवं मंगल कलश पूजन संपन्न कराया गया। मंदिर परिसर में वेदघोष एवं गायत्री महामंत्र के उच्चारण से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बन गया।
मुख्य यजमान महेश कुमार व अनुराधा रहे
इस अवसर पर महायज्ञ के मुख्य यजमान महेश कुमार एवं अनुराधा रहे। यज्ञ कर्म का प्रारम्भ गणेश पूजन से किया गया, जिसके पश्चात कलश स्थापना, नवग्रह पूजन, मातृका पूजन, सरस्वती पूजन एवं वेदमाता गायत्री पूजन विधिवत कराया गया। इसके बाद पवित्र अग्नि में गायत्री महामंत्र के साथ आहुतियों का क्रमबद्ध हवन सम्पन्न हुआ। आयोजन में अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए यज्ञाग्नि में आहुतियाँ समर्पित कर लोककल्याण की कामना की।
मंदिर स्थापना वर्ष 1992 में बसंत पंचमी के दिन हुई
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को जानकारी देते हुए शास्त्री पं. यज्ञ प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना बसंत पंचमी के शुभ दिन, वर्ष 1992 में हुई थी। उन्होंने बताया कि यह मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है तथा यहाँ नियमित रूप से यज्ञ, अनुष्ठान, पूजन, गायत्री साधना एवं धार्मिक आयोजन आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर के शक्तिपीठ में यज्ञोपवीतधारी विप्रों द्वारा चौबीस लाख (24,00,000) हस्तलिखित गायत्री मंत्र विशेष विधि से सुरक्षित रूप से प्रतिष्ठित किए गए हैं, जो मंदिर की विशेष पहचान और गौरव है। साथ ही मंदिर परिसर में गायत्री उपासक चौबीस ऋषियों के मंदिर भी स्थापित हैं, जहाँ श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।
धार्मिक के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र
आयोजकों ने बताया कि मंदिर परिसर में देवी पंचायत की स्थापना के साथ-साथ यहाँ धार्मिक अनुष्ठानों के अतिरिक्त सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी निरंतर आयोजित होते रहते हैं। समाज में संस्कार, सद्भाव और संस्कृति संरक्षण हेतु मंदिर द्वारा कई प्रेरणादायक गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।
आवासीय गुरुकुल वेद पाठशाला का निःशुल्क संचालन
उन्होंने बताया कि मंदिर के अंतर्गत आवासीय गुरुकुल वेद पाठशाला का निःशुल्क संचालन किया जा रहा है, जिसमें विद्यार्थियों को वैदिक शिक्षा, संस्कार एवं अनुशासन की शिक्षा प्रदान की जाती है। गुरुकुल व्यवस्था के अंतर्गत विद्यार्थियों के आवास, भोजन व शिक्षा की समुचित व्यवस्था की जाती है, जिससे वे उत्कृष्ट वेदाध्ययन कर समाज के लिए संस्कारित नागरिक बन सकें।
लीलाधर राजपुरोहित का उपनयन संस्कार भी सम्पन्न
स्थापना दिवस समारोह के दौरान एक विशेष धार्मिक संस्कार के रूप में लीलाधर राजपुरोहित का उपनयन संस्कार भी वैदिक रीति से सम्पन्न कराया गया। संस्कार में वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ यज्ञोपवीत धारण कराया गया।
महाआरती व प्रसाद वितरण
महायज्ञ पूर्णाहुति के पश्चात मंदिर परिसर में महाआरती आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। इसके पश्चात उपस्थित सभी भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति कार्यक्रम में पं. वेदप्रकाश, नारायण प्रसाद, ऋग्वेद शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। उपस्थित भक्तों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज में धर्म-संस्कार और संस्कृति संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत प्रेरणादायक बताया।

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